Pitru Paksha Deepk Niyam : पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का पखवाड़ा माना जाता है। इन दिनों तर्पण और पिंडदान के साथ-साथ शाम के समय दीपक जलाने की भी विशेष परंपरा है। अक्सर लोग घर के मुख्य द्वार या दक्षिण कोने में दीया रखते हैं, लेकिन इसके पीछे की वजह और सही तरीका जानना बेहद जरूरी है।
मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में पितर सूक्ष्म रूप में अपने परिजनों के आसपास आते हैं। शाम के समय जब दिन ढलता है, तब दीपदान करने से उनके मार्ग में उजाला होता है और परिवार को पितरों की कृपा मिलती है।
शाम के समय ही दीपदान क्यों किया जाता है?

दिन और रात के मिलने के समय यानी गोधूलि बेला में पितरों की ऊर्जा अधिक सक्रिय मानी जाती है। सूर्यास्त के बाद का समय आत्माओं के गमन का काल माना गया है।
पुराणों के अनुसार, शाम के समय जलाया गया दीपक पूर्वजों के लिए प्रकाश स्तंभ की तरह काम करता है। यह उनके लौटने के रास्ते को सुगम बनाता है, जिससे तृप्त होकर पितर अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
दक्षिण दिशा में दीपक रखने का क्या कारण है?
शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों का निवास स्थान बताया गया है। इसी वजह से सामान्य दिनों में दक्षिण की ओर मुंह करके पूजा या दीया जलाने की मनाही होती है, लेकिन श्राद्ध पक्ष में यह नियम बदल जाता है।
घर के दक्षिणी कोने में या मुख्य द्वार के दक्षिण हिस्से में दीपक रखने से नकारात्मकता दूर होती है। यदि घर में बिना वजह अशांति रहती है या काम अटकते हैं, तो दक्षिण दिशा में दिया गया यह अर्घ्य पितृ दोष के प्रभाव को हल्का करने में मदद करता है।
किन 3 जगहों पर दीपक जलाना सबसे फलदायी है?
पितृ पक्ष की हर शाम आप इन विशेष स्थानों पर दीपक रख सकते हैं:
घर की दक्षिण दिशा: आंगन या बालकनी के दक्षिणी हिस्से में एक दीया रखें। इसका मुख दक्षिण की ओर होना चाहिए।
मुख्य द्वार: घर के मुख्य दरवाजे के दाहिनी ओर दीपक रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।

पीपल का वृक्ष: यदि संभव हो, तो शाम ढलने के बाद पास के किसी पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाकर दीपक प्रज्वलित करें। पीपल में पितरों और देवताओं दोनों का वास माना गया है।
दीपक जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
सही तेल का चुनाव: पितरों के नाम का दीपक जलाते समय तिल के तेल या सरसों के तेल का उपयोग सबसे अच्छा माना जाता है। यदि यह उपलब्ध न हो, तो गाय के शुद्ध घी का प्रयोग भी कर सकते हैं।
- मिट्टी का साफ दीपक: हमेशा नए या साफ मिट्टी के दीये का उपयोग करें। ध्यान दें कि दीया कहीं से चटका या खंडित न हो।
- हाथ जोड़कर प्रार्थना: दीया जलाने के बाद दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके खड़े हों। मन ही मन पूर्वजों को प्रणाम करें और जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें।
- शुद्धता का भाव: शाम की पूजा और दीपदान हमेशा हाथ-पैर धोकर, शांत मन और साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर ही करें।










