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MDDA Demolition Drive : मसूरी जाने वाले रास्ते पर एमडीडीए का एक्शन, धड़ल्ले से बन रही इस बड़ी इमारत पर लगा ताला

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Fri, 07 Aug 2026 08:04 PM IST

एमडीडीए ने देहरादून के मेहूवाला माफी और शिमला बायपास पर बिना नक्शे के विकसित हो रही करीब 19 बीघा की अवैध प्लाटिंग को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया है। मसूरी रोड पर गलोगी धार में भी एक बड़े अवैध निर्माण पर सीलिंग की कार्रवाई की गई है।

MDDA Demolition Drive : मसूरी जाने वाले रास्ते पर एमडीडीए का एक्शन, धड़ल्ले से बन रही इस बड़ी इमारत पर लगा ताला

मुख्य बातें

  • मेहूवाला माफी में 4 बीघा अवैध प्लाटिंग ध्वस्त।
  • गलोगी धार में नितिन खन्ना का निर्माण सील।
  • कारवारी ग्रांट में 15 बीघा की अवैध कॉलोनी टूटी।
  • सीएम धामी के जीरो टॉलरेंस निर्देश पर कार्रवाई।

देहरादून, 07 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

MDDA Demolition Drive : मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की प्रवर्तन टीम ने शुक्रवार को शहर के बाहरी इलाकों में पनप रही अवैध कॉलोनियों पर भारी मशीनों के साथ कार्रवाई की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में भ्रष्टाचार और बिना नक्शे के हो रहे निर्माण कार्यों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। प्राधिकरण के अधिकारियों ने इन निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से अमल करते हुए दो अलग-अलग क्षेत्रों में चल रही प्लाटिंग को पूरी तरह से उखाड़ फेंका। एक अन्य व्यावसायिक मार्ग पर हो रहे निर्माण पर ताला जड़ दिया गया। यह कार्रवाई शहर में जमीन खरीद रहे लोगों के लिए एक सीधा अलर्ट है।

कैलाशपुर रोड स्थित मेहूवाला माफी में एमडीडीए की मशीनें सुबह ही पहुंच गईं। यहां मुर्सलीन, सुल्तान और उनके अन्य सहयोगियों द्वारा लगभग चार बीघा कृषि भूमि को टुकड़ों में बांटकर रिहायशी प्लाटिंग के रूप में विकसित किया जा रहा था। इस पूरी जमीन का कोई भी लेआउट या मानचित्र प्राधिकरण से पास नहीं कराया गया था।

अधिकारियों ने मौके पर बनाई गई कच्ची सड़कों, बाउंड्री वॉल और भूखंडों की मार्किंग को बुलडोजर से समतल कर दिया। मुर्सलीन और सुल्तान को पूर्व में उत्तराखण्ड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 की प्रासंगिक धाराओं के तहत कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। काम रोकने के आदेशों की सीधे तौर पर अनदेखी की जा रही थी। तय सीमा में कोई जवाब न आने पर प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण का अंतिम कदम उठाया।

पर्यटकों की भारी आवाजाही वाले मसूरी-देहरादून मोटर मार्ग पर भी प्रवर्तन टीम ने अपना शिकंजा कसा। गलोगी धार क्षेत्र में मुख्य हाईवे के किनारे नितिन खन्ना द्वारा एक बड़े निर्माण कार्य को अंजाम दिया जा रहा था। मौके पर मौजूद कामगारों से जब निर्माण की स्वीकृति मांगी गई तो वे कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सके।

टीम ने तुरंत काम रुकवाकर पूरे ढांचे पर लाल रंग की सील लगा दी। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रजिस्टर और निर्माण सामग्री को भी अपने कब्जे में ले लिया। बिना अनुमति के पहाड़ी ढलान वाले इस संवेदनशील रास्ते पर किसी भी तरह के कंक्रीट स्ट्रक्चर को खड़ा करने से सीधा खतरा पैदा होता है। सीलिंग के बाद वहां पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है ताकि रात के अंधेरे में कोई दोबारा निर्माण शुरू न कर सके।

तीसरी और सबसे बड़ी कार्रवाई शिमला बाईपास रोड से सटी कारवारी ग्रांट नहर वाली रोड पर की गई। शिव प्रसाद नैनवाल और जगदीश प्रसाद नैनवाल यहां 10 से 15 बीघा के विशाल भूभाग पर एक नई कॉलोनी बसाने की तैयारी कर रहे थे। यहां बिजली के खंभे गाड़ने और सड़कों के लिए बजरी बिछाने का काम चल रहा था।

एमडीडीए ने यहां पहले ही वाद योजित कर रखा था। नैनवाल बंधुओं को प्राधिकरण के दफ्तर में अपना पक्ष रखने का पूरा समय दिया गया था। उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज और तर्क जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहे थे। शुक्रवार को जब बुलडोजर यहां पहुंचे तो पूरी 15 बीघा जमीन पर किए गए निर्माण को मलबे में बदल दिया गया। इस विशाल जमीन पर प्लाट खरीदने का मन बना चुके कई निवेशकों का पैसा अब फंसने से बच गया है।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने इस पूरी कार्रवाई की मॉनिटरिंग खुद की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देश बिल्कुल साफ हैं और किसी भी बिल्डर को नियमों की धज्जियां उड़ाकर कंक्रीट का जंगल खड़ा करने की छूट नहीं मिलेगी। उन्होंने अवैध कॉलोनाइजरों को चेतावनी दी है कि वे आम जनता की गाढ़ी कमाई के साथ खिलवाड़ बंद करें। तिवारी ने नागरिकों से अपील की कि वे लुभावने विज्ञापनों में फंसकर ऐसी किसी जमीन पर पैसा न लगाएं जिसका लेआउट एमडीडीए से विधिवत पास न हो।

प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम का नेतृत्व कर रहे मोहन सिंह बर्निया ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। उनकी टीमें शहर के चारों तरफ नियमित गश्त कर रही हैं। ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए भी नई प्लाटिंग पर नजर रखी जा रही है। बर्निया ने कहा कि भू-उपयोग बदले बिना कृषि भूमि पर बन रही हर कॉलोनी पर इसी तरह का हथौड़ा चलेगा। उन्होंने देहरादून में बसने की चाहत रखने वाले लोगों से साफ कहा है कि जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले प्राधिकरण के दफ्तर में आकर उसकी वैधानिक स्थिति की क्रॉस चेकिंग जरूर करें।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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