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अब पहाड़ के युवाओं को नहीं जाना पड़ेगा शहर, हॉस्टल में ही मिलेगी फ्री कोचिंग

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Fri, 30 Oct 2026 03:43 PM IST

उत्तराखंड के 15 एससी-एसटी छात्रावास अब हाईटेक स्टडी सेंटर बनेंगे। बाहरी छात्रों को भी डिजिटल क्लास, वाई-फाई और मुफ्त प्रतियोगी किताबों की सुविधा मिलेगी।

uttarakhand digital hostel

मुख्य बातें

  • हॉस्टल के बाहर रहने वाले युवा भी उठाएंगे मुफ्त सुविधाओं का लाभ।
  • प्रथम चरण में 15 एससी-एसटी छात्रावास बनेंगे डिजिटल स्टडी सेंटर।
  • यूपीएससी, यूकेपीएससी और एसएससी की तैयारी के लिए मिलेंगी आधुनिक किताबें।

देहरादून (30 अक्टूबर) : उत्तराखंड के दूरदराज और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राहत भरी खबर है। समाज कल्याण विभाग अब प्रदेश के अनुसूचित जाति (एससी) और जनजाति (एसटी) छात्रावासों को केवल रहने की चारदीवारी तक सीमित न रखकर उन्हें आधुनिक कोचिंग और डिजिटल स्टडी सेंटर के रूप में बदलने जा रहा है।

इस योजना का सबसे बड़ा जमीनी बदलाव यह है कि इन छात्रावासों में लगने वाली डिजिटल क्लासरूम, हाई-स्पीड इंटरनेट और लाइब्रेरी का लाभ केवल वहां रहने वाले छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के गांवों में रहने वाले अन्य स्थानीय युवा भी यहां आकर मुफ्त में पढ़ाई कर सकेंगे। विभाग ने पहले चरण में प्रदेश के 15 छात्रावासों का चयन कर इस योजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बाहरी छात्रों को भी मिलेगा मुफ्त डिजिटल एक्सेस

समाज कल्याण सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी के अनुसार इस बदलाव का मकसद दूरदराज के क्षेत्रों में शैक्षणिक असमानता को खत्म करना है। पहले चरण में चयनित 15 छात्रावासों में बड़ी एलईडी स्क्रीन, लैपटॉप, हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी और निर्बाध वाई-फाई की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही इन परिसरों में अलग से शांत और सुव्यवस्थित रीडिंग रूम तैयार किए जाएंगे।

आमतौर पर सरकारी छात्रावासों के संसाधन सिर्फ वहां पंजीकृत छात्रों के लिए आरक्षित रहते हैं, लेकिन इस नई व्यवस्था में आसपास के गांवों के वे छात्र भी इन डिजिटल कक्षाओं और पुस्तकों का लाभ ले सकेंगे जो आर्थिक तंगी के कारण महंगी कोचिंग या इंटरनेट की सुविधा नहीं जुटा पाते।

पहाड़ में महंगी कोचिंग और कमजोर नेटवर्क की चुनौती

उत्तराखंड के सीमांत और पर्वतीय जिलों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। एक तरफ स्थानीय स्तर पर इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्तरीय अध्ययन सामग्री का अभाव रहता है, तो दूसरी तरफ बड़े शहरों में रहकर कोचिंग लेने का भारी-भरकम खर्च हर परिवार नहीं उठा सकता। इस मजबूरी के चलते बड़ी संख्या में युवाओं को देहरादून, हल्द्वानी या दिल्ली का रुख करना पड़ता है।

समाज कल्याण विभाग का यह कदम सीधे तौर पर उस खाई को पाटने का प्रयास है, जिससे ग्रामीण छात्र अपने ही क्षेत्र के सरकारी छात्रावास में बैठकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के डिजिटल लेक्चर और ऑनलाइन मॉक टेस्ट से जुड़ सकेंगे।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विकसित होंगे हाईटेक केंद्र

वर्तमान में उत्तराखंड में समाज कल्याण विभाग के तहत 15 अनुसूचित जाति और 5 जनजातीय छात्रावास संचालित हो रहे हैं। इनमें से 15 छात्रावासों को पहले चरण में पूरी तरह अपग्रेड किया जा रहा है। इन केंद्रों के पुस्तकालयों में अकादमिक पाठ्यक्रमों के अलावा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं से जुड़ी स्तरीय किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी।

विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि इन छात्रावासों को केवल रात बिताने का ठिकाना न बनाकर प्रशासनिक और प्रतियोगी सेवाओं की तैयारी कराने वाले मजबूत अध्ययन केंद्र के रूप में स्थापित किया जाए।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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