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2027 चुनाव से पहले जनता का मूड साफ, उत्तराखंड में आज चुनाव हों तो BJP को मिलेंगी 54 सीटें

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Mon, 14 Sep 2026 12:41 PM IST

उत्तराखंड में 2027 से पहले आए एक बड़े सर्वे में भाजपा को 70 में से 54 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। महिला आरक्षण और सख्त कानूनों पर जनता ने सीएम धामी की नीतियों पर मुहर लगाई है।

Uttarakhand political survey

मुख्य बातें

  • 70 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा को 54 सीटें मिलने का अनुमान।
  • सरकारी नौकरियों में 30% महिला आरक्षण के फैसले को 88% समर्थन मिला।
  • सांस्कृतिक संरक्षण और मूल स्वरूप की नीति पर 70% जनता सहमत दिखी।
  • 60 वर्ष से अधिक उम्र के 51.8% मतदाताओं ने धामी सरकार को पसंद किया।
  • बनिया/कायस्थ वर्ग में सर्वाधिक 57.3% और ओबीसी में 50.6% समर्थन दर्ज।

दून हॉराइज़न, देहरादून (14 सितंबर): आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन सियासी बिसात पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पकड़ बेहद मजबूत नजर आ रही है। एक ताजा जनमत सर्वेक्षण (Political Survey) के अनुसार, यदि आज की तारीख में उत्तराखंड में चुनाव हो जाएं, तो 70 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी 54 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज कर सकती है। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार विरोधी लहर (Anti-Incumbency) के पारंपरिक रुझान के उलट जनता का विश्वास मौजूदा नेतृत्व पर और गहराया है।

याद दिला दें कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 47 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी का मिथक तोड़ा था। अब 54 सीटों का नया अनुमान दिखाता है कि पार्टी अपनी स्थिति में सात सीटों का और इजाफा कर सकती है।

महिला आरक्षण और देवभूमि की पहचान पर जबरदस्त जनसमर्थन

सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश लोगों ने धामी कैबिनेट के नीतिगत फैसलों पर स्पष्ट सहमति जताई। उत्तराखंड में स्थानीय महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण देने के कानून पर 88 प्रतिशत जनता ने पूर्ण समर्थन दिया, जबकि इसका पूरी तरह विरोध करने वालों की संख्या महज पांच फीसदी रही। वहीं, राज्य की जनसांख्यिकी और सांस्कृतिक पहचान यानी देवभूमि के मूल स्वरूप को अक्षुण्ण रखने के प्रशासनिक अभियानों को 70 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सही ठहराया।

धर्मनगरी और पहाड़ी अंचलों में जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त पर रोक और सत्यापन अभियान को स्थानीय आबादी का सीधा जुड़ाव मिला है।

सामाजिक समीकरणों में हर वर्ग ने स्वीकारा नेतृत्व

चुनावी राजनीति में जातियों का अंकगणित हमेशा अहम होता है। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि धामी सरकार की अपील किसी एक विशेष समुदाय तक सीमित नहीं रही। आंकड़ों पर नजर डालें:

  • बनिया/कायस्थ वर्ग: 57.3%
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 50.6%
  • पंजाबी-सिख समुदाय: 49.7%
  • ब्राह्मण वर्ग: 46.3%
  • राजपूत वर्ग: 46.1%
  • अनुसूचित जाति (SC): 45.3%

पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों के प्रमुख सामाजिक घटकों के बीच 45 प्रतिशत से अधिक का स्थिर समर्थन यह दर्शाता है कि सत्ता विरोधी लहर की धार फिलहाल कुंद है।

युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक हर पीढ़ी में पैठ

उम्र के हिसाब से किए गए विश्लेषण में सबसे दिलचस्प बात यह सामने आई कि उम्र बढ़ने के साथ सरकार के प्रति समर्थन का अनुपात लगातार बढ़ा है। 18 से 25 साल के पहली बार वोट डालने वाले 37.8 फीसदी युवाओं ने सरकार को पसंद किया, तो 26 से 35 आयु वर्ग में यह आंकड़ा 43 फीसदी रहा। वहीं, 36 से 50 वर्ष में 46.8 फीसदी, 51 से 60 वर्ष में 50.3 फीसदी और 60 साल से अधिक आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों में 51.8 फीसदी लोगों ने धामी सरकार के कामकाज पर भरोसा जताया।

दरअसल, राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने और समान नागरिक संहिता (UCC) पारित किए जाने के बाद से शासन की छवि पारदर्शी निर्णय लेने वाली बनी है। अगर यह सियासी मिजाज 2027 तक कायम रहा, तो विपक्षी दलों के लिए सत्ता वापसी की राह बेहद कठिन साबित होने वाली है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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