हरिद्वार (21 अक्टूबर) : अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ के चेहरे को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने बुधवार को हरिद्वार में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्र और उत्तराखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि सीबीआई जांच के दायरे में घिरे भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त कर उन्हें संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत कानूनी जांच से ‘संवैधानिक सुरक्षा कवच’ दे दिया गया है।
राजभवन की शपथ पर उठे तीखे कानूनी सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि फरवरी 2026 में जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले में अज्ञात वीआईपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, तब से जांच आगे नहीं बढ़ाई गई। पार्टी के अनुसार, पूर्व विधायक सुरेश राठौर के कथित बयान और वायरल वीडियो क्लिप में दुष्यंत गौतम के नाम का जिक्र होने के बावजूद जांच पूरी किए बिना उन्हें 12 अक्टूबर को राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि 19 अक्टूबर को शपथ लेने के बाद अब कोई भी जांच एजेंसी राज्यपाल के पद पर रहते हुए उनसे पूछताछ नहीं कर सकती, जिससे वीआईपी एंगल की जांच ठंडे बस्ते में जाने का अंदेशा है।
वनंतरा रिसॉर्ट में सबूत मिटाने का पुराना विवाद
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस ने सितंबर 2022 में ऋषिकेश के वनंतरा रिसॉर्ट में हुई घटना के पुराने विवादों को फिर से उठाया। पार्टी ने पूछा कि जब हत्या का मामला दर्ज हुआ था, तब रातों-रात घटनास्थल पर किसके निर्देश पर बुलडोजर चलाया गया और बाद में वहां दो बार हुई आगजनी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। इसके अलावा, मुख्य आरोपी पुलकित आर्य के फोन की फॉरेंसिक और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) को अंकिता के फोन की तरह गहराई से क्यों नहीं खंगाला गया, जिससे उस रात ‘स्पेशल सर्विस’ मांगने वाले वीआईपी की पहचान उजागर हो सकती थी।
इंडिया गेट पर परिजनों को हिरासत का असर
अंकिता के माता-पिता द्वारा न्याय की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पर दिए गए धरने और 15 अक्टूबर की देर रात पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लिए जाने की घटना को कांग्रेस ने बेहद असंवेदनशील बताया। पार्टी ने आरोप लगाया कि जब पीड़ित माता-पिता राष्ट्रपति से मिलकर गुहार लगाना चाहते थे, तब प्रशासनिक तंत्र ने उन्हें थाने में बैठा दिया। उत्तराखंड में इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच गहरा असंतोष है। कांग्रेस ने ऐलान किया कि जब तक वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं होता और कथित ऑडियो क्लिप की स्वतंत्र फॉरेंसिक जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।




