देहरादून (17 अक्टूबर) : अंकिता मर्डर प्रकरण को लेकर उत्तराखंड में सियासी तकरार तेज हो गई है। भाजपा ने मामले पर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों को राजनैतिक पाखंड करार देते हुए पलटवार किया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विकासनगर से विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई कर दोषियों को उम्रकैद की सजा दिलवाई और अब सीबीआई जांच चल रही है, लेकिन कांग्रेस आगामी चुनावों को देखते हुए इस संवेदनशील मुद्दे पर भ्रम फैला रही है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली के जेएनयू में महिला उत्पीड़न के आरोपों से घिरे कांग्रेस सांसद पर पार्टी नेतृत्व की चुप्पी पर कड़े सवाल उठाए।
जेएनयू विवाद पर कांग्रेस नेतृत्व से सीधा सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि अंकिता मर्डर केस में न्याय की प्रक्रिया पारदर्शी रही है, लेकिन कांग्रेस इस पर केवल राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो कांग्रेस नेता दिल्ली से लेकर देहरादून तक प्रदर्शन कर रहे हैं, वे अपनी ही पार्टी के उस सांसद पर खामोश हैं, जिन पर जेएनयू की छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।
चौहान ने दावा किया कि आंतरिक जांच के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उक्त प्रोफेसर व सांसद के खिलाफ निष्कासन का कदम उठाया, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने उन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की। भाजपा विधायक ने कहा कि महिला सुरक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस का यह दोहरा रवैया जनता के सामने आ चुका है।
त्वरित गिरफ्तारी से उम्रकैद तक कानूनी पैरवी
राज्य सरकार के कदमों का ब्योरा देते हुए विधायक ने कहा कि घटना के महज 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपियों को जेल भेजा गया था। एसआईटी जांच के जरिए मजबूत साक्ष्य जुटाए गए, जिसके चलते अदालत ने आरोपियों को जमानत नहीं दी और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार के आग्रह पर तीन बार सरकारी वकील तक बदले गए ताकि पैरवी में कोई कसर न रहे।
उच्च न्यायालय ने भी सरकार के प्रयासों और जांच प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त किया था। परिजनों की मांग और सहमति को ध्यान में रखते हुए ही अब इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई है।
सबूत हैं तो सीबीआई को सौंपे विपक्ष
मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी पीड़ित परिजनों से मिलकर निष्पक्ष व त्वरित जांच का भरोसा दे चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि यदि विपक्षी दल या किसी भी व्यक्ति के पास मामले से जुड़े कोई नए या पुख्ता साक्ष्य हैं, तो वे सोशल मीडिया या सड़कों पर राजनीति करने के बजाय सीधे जांच एजेंसी के समक्ष पेश करें।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा रखने के बजाय कांग्रेस चुनावी लाभ के लिए देवभूमि की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है, जिसका जवाब राज्य की जनता लोकतांत्रिक तरीके से देगी।




