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उत्तराखंड में पैदल चलने वालों के लिए बदलेंगे नियम, सरकार ला रही है नई सुरक्षा नीति

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Tue, 21 Apr 2026 01:50 PM IST

उत्तराखंड परिवहन विभाग ने राहगीरों और गैर-यांत्रिक वाहनों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक नीति का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इस नीति के तहत पैदल यात्रियों को क्रॉसिंग पर प्राथमिकता देने के साथ-साथ उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने का भी प्रावधान किया जा रहा है।

Uttarakhand Pedestrian Safety Policy

मुख्य बातें

  • जेब्रा क्रॉसिंग पर रुकना अनिवार्य; पैदल यात्रियों को मिलेगी पहली प्राथमिकता।
  • नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर पैदल व गैर-यांत्रिक वाहनों का प्रवेश होगा प्रतिबंधित।
  • फुटपाथ न होने की स्थिति में यातायात की विपरीत दिशा (Facing Traffic) में चलना होगा।

देहरादून, 21 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड की सड़कों पर पैदल चलने वाले राहगीरों और गैर-यांत्रिक वाहनों (जैसे तांगा, बैलगाड़ी) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार एक नई ‘ठोस सुरक्षा नीति’ लागू करने की तैयारी में है।

परिवहन मुख्यालय ने इस संबंध में विस्तृत नियमावली तैयार कर शासन को भेज दी है। इस प्रस्तावित नीति में न केवल राहगीरों को सड़क पर प्राथमिकता देने की बात कही गई है, बल्कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के लिए भारी जुर्माने का भी प्रावधान शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई

यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले वर्ष ‘राजशेखर बनाम केंद्र सरकार’ मामले में दिए गए निर्देशों के क्रम में उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों को पैदल यात्रियों और गैर-यांत्रिक परिवहन माध्यमों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट मानक और बुनियादी ढांचा तैयार करने का आदेश दिया था।

अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के नेतृत्व में तैयार किए गए इस प्रस्ताव का वर्तमान में शासन स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, विभागीय समीक्षा के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट में पेश किया जाएगा।

क्रॉसिंग पर राहगीर को मिलेगी प्राथमिकता

प्रस्तावित नियमावली में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं तय की गई हैं। नए नियमों के तहत चिह्नित जेब्रा क्रॉसिंग पर सड़क पार करने का पहला अधिकार राहगीर का होगा। वहां से गुजरने वाले हर मोटर वाहन चालक को ‘स्टॉप लाइन’ से पहले रुकना अनिवार्य होगा। यही नियम तांगा, बैलगाड़ी या हाथगाड़ी चलाने वालों पर भी लागू होगा, उन्हें भी पैदल यात्रियों को रास्ता देना होगा।

हाईवे पर पाबंदी और बुनियादी ढांचे का विस्तार

तेज रफ्तार वाहनों के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर पैदल चलने और गैर-यांत्रिक वाहनों के संचालन को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा सकता है। आबादी के घनत्व को देखते हुए इन राजमार्गों पर हर एक से तीन किलोमीटर के अंतराल पर अंडरपास या फुटओवर ब्रिज (FOB) बनाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, सभी प्रमुख मार्गों पर फुटपाथ का निर्माण अनिवार्य होगा और जगह-जगह यातायात नियमों के बोर्ड लगाए जाएंगे।

फुटपाथ न होने पर नए नियम

नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह प्रस्तावित है कि जिन सड़कों पर फुटपाथ उपलब्ध नहीं होगा, वहां पैदल यात्रियों को यातायात की विपरीत दिशा (Opposite to traffic flow) में चलना होगा। इससे राहगीर सामने से आने वाले वाहनों को देख सकेंगे और संभावित दुर्घटनाओं से बच सकेंगे। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस नीति का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की दर को न्यूनतम स्तर पर लाना है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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