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महज 60 हजार रुपये सालाना फीस पर होगी पढ़ाई, लेकिन छात्रों को पूरी करनी होगी यह बड़ी शर्त

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Fri, 18 Sep 2026 04:27 PM IST

उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पीजी करने वाले डॉक्टरों को अब दो साल राज्य में सेवा देनी होगी। सरकार ने नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भेजा है।

Uttarakhand PG Medical Doctors Bond Rule

मुख्य बातें

  • पीजी करने वाले डॉक्टरों को दो साल उत्तराखंड में सेवा देनी होगी।
  • चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भेजा है।
  • राज्य के मेडिकल कॉलेजों में पीजी की कुल 260 सीटें हैं।
  • सिमली में बेस अस्पताल की मांग को लेकर ग्रामीणों ने दी चेतावनी।

दून हॉराइज़न, देहरादून (18 सितंबर) : उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) करने वाले डॉक्टरों के लिए दो साल की अनिवार्य सेवा का दायरा तय कर दिया गया है।

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में नियमों में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। पर्वतीय क्षेत्रों और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है, जिसे दूर करने के लिए अब बॉंड प्रणाली को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

260 सीटों पर लागू होगा नया नियम

राज्य के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की कुल 260 सीटें उपलब्ध हैं। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, इन सभी सीटों को अब नए बॉंड के दायरे में भरा जाएगा। प्रवेश लेने वाले एमबीबीएस डॉक्टरों को दाखिले के समय ही दो साल का बॉंड भरना होगा, जिसके तहत कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें राज्य के भीतर ही अपनी सेवाएं देनी होंगी।

इस व्यवस्था के तहत छात्रों को केवल 60 हजार रुपये सालाना की मामूली फीस पर उच्च शिक्षा का लाभ मिलेगा। वर्तमान में सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञों के करीब पचास प्रतिशत पद खाली चल रहे हैं, जिससे मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

चमोली के सिमली में बेस अस्पताल को लेकर गरमाई सियासत

दूसरी ओर, चमोली जिले के सिमली में महिला अस्पताल को बेस अस्पताल में उच्चीकृत न किए जाने से स्थानीय स्तर पर आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। संघर्ष समिति ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शासनादेश जारी नहीं किया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष देवेंद्र नेगी ने बताया कि इस मुद्दे पर आगामी रविवार को एक विशाल महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें कर्णप्रयाग, गैरसैण, थराली और नारायणबगड़ समेत दूरदराज के कई गांवों से लोग जुटेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में मशाल जुलूस निकालने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई है, और यदि मांग पूरी नहीं हुई तो सिमली से देहरादून मुख्यमंत्री आवास तक पद संचलन किया जाएगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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