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UPNL Employees : सरकार को नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ा झटका! कर्मचारियों की सैलरी से नहीं होगी कोई भी ‘वसूली’

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Tue, 30 Jun 2026 09:18 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों में उपनल के अलावा अन्य एजेंसियों से काम कर रहे कर्मचारियों से प्रोत्साहन राशि की रिकवरी पर रोक लगा दी है। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक को कर्मचारियों के प्रत्यावेदन पर 10 सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

UPNL Employees : सरकार को नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ा झटका! कर्मचारियों की सैलरी से नहीं होगी कोई भी 'वसूली'

मुख्य बातें

  • हाईकोर्ट ने अन्य एजेंसी के कर्मचारियों को दी राहत।
  • प्रोत्साहन राशि की रिकवरी पर कोर्ट ने लगाई रोक।
  • कर्मचारियों को 10 दिन के भीतर देना होगा प्रत्यावेदन।
  • राजाजी पार्क निदेशक 10 सप्ताह में लेंगे अंतिम निर्णय।

देहरादून, 30 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।

UPNL Employees : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी विभागों में बाहरी एजेंसियों के माध्यम से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों से प्रोत्साहन राशि की वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत में इस विवाद से जुड़ी कई अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने वन विभाग और राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक को सख्त निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ताओं के प्रत्यावेदन पर तय समय सीमा के भीतर विधि अनुसार अंतिम निर्णय लिया जाए। अदालती कार्यवाही पूरी होने के बाद पीड़ितों की प्रार्थना को स्वीकार करते हुए सभी याचिकाओं को निस्तारित कर दिया गया है।

अदालत ने तय किया है कि पीड़ित कर्मचारी अगले दस दिन के भीतर अपना प्रत्यावेदन विभाग के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। निदेशक राजाजी नेशनल पार्क को इन प्रत्यावेदनों पर 10 सप्ताह के भीतर हर हाल में अपना फैसला सुनाना होगा। जब तक कर्मचारियों के प्रत्यावेदन पर विभागीय स्तर से कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हो जाता तब तक उनके वेतन या प्रोत्साहन राशि से किसी भी तरह की रिकवरी नहीं की जा सकेगी।

राजाजी नेशनल पार्क में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर पंकज, मोहित और अन्य कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर राज्य सरकार की नीतियों को चुनौती दी थी। इन कर्मचारियों का सीधा आरोप था कि राज्य सरकार उपनल और अन्य बाहरी एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों के बीच जानबूझकर वर्ग भेद पैदा कर रही है। सरकार ने इन्हें पूर्व में दी गई प्रोत्साहन राशि को वापस वसूलने का फरमान जारी कर दिया था जिसे अदालत के संज्ञान में लाया गया।

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद राजकीय सेवाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए इन कर्मचारियों को वर्ष 2014 और 2016 में अलग-अलग बाह्य एजेंसियों के जरिए नियुक्त किया गया था। शुरुआती नियुक्ति के बाद विभाग ने अन्य एजेंसियों के माध्यम से लगातार इनकी सेवाओं का विस्तार किया। वर्ष 2019 से इन सभी कर्मचारियों को आधिकारिक तौर पर उपनल कर्मचारी मान लिया गया और तब से वे लगातार वन विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शासन ने हाल ही में तर्क दिया कि इन ऑपरेटरों की मूल नियुक्ति उपनल से नहीं हुई थी। सरकार ने इसी आधार पर पूर्व में दी गई पूरी प्रोत्साहन राशि की वसूली के आदेश थमा दिए। कर्मचारियों ने इस विभागीय फरमान को पूरी तरह अनुचित ठहराते हुए नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब अदालत के आदेश से यह तय हो गया है कि बिना प्रत्यावेदन निस्तारित किए किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई वित्तीय विधिक कार्रवाई नहीं होगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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