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उत्तराखंड में गंदा पानी पीने से हाहाकार, सीएम धामी ने 15 दिन में मांगी पेयजल-सीवर ऑडिट रिपोर्ट

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Tue, 15 Sep 2026 06:27 PM IST

नैनीताल और उत्तरकाशी में दूषित पानी से सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया है। पूरे राज्य में सीवर व पेयजल लाइन ऑडिट के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई है।

Uttarakhand Contaminated Drinking Water

मुख्य बातें

  • नैनीताल और उत्तरकाशी में दूषित पानी के प्रकोप बाद 15 दिन में ऑडिट रिपोर्ट तलब।
  • सीएम ने 1905 हेल्पलाइन पर शिकायतकर्ताओं को सीधे फोन मिलाकर लिया वास्तविक फीडबैक।
  • हरिद्वार में तीन माह से सूखी टंकी पर सीडीओ को मौके पर जाने का आदेश।
  • तहसीलों में दाखिल-खारिज और भूमि धोखाधड़ी मामलों को समयबद्ध निपटाने का निर्देश।
  • 15 अक्टूबर के बाद प्रदेश की सड़कों का औचक निरीक्षण खुद करेंगे मुख्यमंत्री।

दून हॉराइज़न, देहरादून (15 सितंबर): पर्वतीय जिलों में नलों से आ रहे मटमैले और दूषित पानी ने जब सैकड़ों नागरिकों को अस्पताल पहुंचा दिया, तब जाकर शासन की तंद्रा टूटी है। नैनीताल और उत्तरकाशी में उल्टी-दस्त व पेट संक्रमण (Gastroenteritis) के बढ़ते मामलों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में जल संस्थान और प्रशासन के आला अधिकारियों को दो टूक अल्टीमेटम थमा दिया।

साफ निर्देश हैं कि पूरे प्रदेश में बिछी पेयजल और सीवर लाइनों का संयुक्त ऑडिट कराया जाए और 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी जाए। दरअसल, कई पहाड़ी कस्बों में पुरानी पड़ चुकी सीवर लाइनें पेयजल पाइपों के समानांतर गुजर रही हैं। लीकेज की वजह से दोनों के आपस में मिलने की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा।

कागजों पर फाइल बंद करने वालों की खैर नहीं, सीधे फोन पर बात

सचिवालय में ‘सीएम हेल्पलाइन 1905’ की मैराथन समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने सिर्फ फाइलों के आंकड़े नहीं देखे, बल्कि खुद फोन उठाकर आम जनता से सीधी बात की।

अल्मोड़ा के आयुष बिष्ट से छात्रवृत्ति मिलने में देरी पर पूछा, तो उन्होंने काम होने की पुष्टि की। लेकिन बाकी मामलों में जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। संजय कुमार रावत को जब फोन पर आवाज आई—”संजय जी, मैं पुष्कर सिंह धामी बोल रहा हूं, आपकी समस्या हल हुई कि नहीं?”—तब पता चला कि उनके दिवंगत पिता के मेडिकल रीइंबर्समेंट के बिल महीनों से दफ्तरों में धूल फांक रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अफसरों को तत्काल भुगतान के निर्देश दिए।

वहीं हरिद्वार की गीता देवी ने पोल खोलते हुए बताया कि उनके इलाके में तीन महीने पहले ओवरहेड टैंक बन चुका है, मगर एक बूंद पानी नहीं टपका। इस पर मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद हरिद्वार के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) से सख्त नाराजगी जताई और फौरन ग्राउंड पर जाकर लाइन चालू कराने को कहा।

तहसीलों में दाखिल-खारिज और भूमि विवादों पर निगरानी

पेयजल के अलावा राजस्व मामलों में आम जनता की परेशानी पर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि वे तहसीलों में जाकर औचक जांच करें।

दाखिल-खारिज (Land Mutation) के मामले महीनों तक लटकाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाते हुए तय समयसीमा में निस्तारण अनिवार्य किया गया है। साथ ही पर्वतीय और मैदानी जिलों में बढ़ रही जमीनी धोखाधड़ी पर प्राथमिकता से मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, एल. फैनई, डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगोली, डॉ. पंकज कुमार पांडेय और डीजीपी दीपम सेठ की मौजूदगी वाली इस बैठक में साफ चेताया गया कि जिन कर्मियों का काम ढीला मिला, उनकी एसीआर (ACR) खराब होगी।

सड़क के गड्ढे और मौसमी बीमारियों पर कड़ा रुख

बरसात बीतने के साथ ही राज्य में स्वाइन फ्लू, डेंगू और जल जनित बीमारियों का जोखिम बढ़ गया है। अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयां और वार्डों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए सीएम ने औचक दौरों का आदेश दिया है।

चलते-चलते मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को भी आगाह कर दिया—15 अक्टूबर के बाद वे खुद सड़क मार्ग से जिलों के दौरे पर निकलेंगे। गड्ढा-मुक्त सड़कों के दावों की असलियत अगर सड़क पर उतरी गाड़ी के झटकों ने खोली, तो जिम्मेदारों पर सीधी गाज गिरेगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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