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उत्तराखंड में फायर सेफ्टी पर नया कानून पास, लापरवाही पर होगी सीधी जेल

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 29 Oct 2026 02:50 PM IST

उत्तराखंड में नया फायर सेफ्टी कानून पास। अब आग लगने पर भवन मालिकों पर बीएनएस के तहत केस चलेगा, साथ ही अवैध होटल और अस्पताल तुरंत सील किए जाएंगे।

Uttarakhand fire safety bill 2026

मुख्य बातें

  • गंभीर आगजनी पर अब सीधे बीएनएस के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा।
  • होटल और होमस्टे के लिए 9 मीटर ऊंचाई पर फायर एनओसी अनिवार्य।
  • सुरक्षा में चूक पर उपकरण लागत का डेढ़ गुना तक जुर्माना लगेगा।

देहरादून (29 अक्टूबर) : उत्तराखंड में अब भवनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सिर्फ प्रशासनिक जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि किसी नागरिक की जान जाने या गंभीर चोट लगने पर सीधे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा।

राज्य विधानसभा में ‘उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026’ ध्वनिमत से पारित हो गया है। इस नए कानून के जरिए सरकार ने फायर ब्रिगेड को केवल आग बुझाने तक सीमित न रखकर भवनों को खाली कराने, सील करने और सीधे कानूनी शिकंजा कसने के असाधारण अधिकार सौंप दिए हैं। पर्यटन बहुल राज्य होने के चलते इसका सीधा असर पहाड़ों में संचालित हजारों होटलों, होमस्टे, निजी अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों पर पड़ेगा।

लापरवाही पर सीधे दर्ज होगी बीएनएस की एफआईआर

अब तक आग लगने के मामलों में ज्यादातर कार्रवाई नोटिस और मामूली जुर्माने तक सिमट जाती थी, लेकिन नए कानून ने इसे सीधे आपराधिक जवाबदेही से जोड़ दिया है। यदि किसी परिसर में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई और वहां आग लगने से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है या कोई गंभीर रूप से घायल होता है, तो संबंधित भवन मालिक या संचालक के खिलाफ बीएनएस की धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा।

हालांकि, पुलिस व अग्निशमन विभाग घटना के तथ्यों और फोरेंसिक जांच के आधार पर आपराधिक जिम्मेदारी तय करेगा। इसके साथ ही आपातकालीन सेवाओं को गुमराह करने या आगजनी की झूठी सूचना (हॉक्स कॉल) देने वालों के खिलाफ भी कानूनी दंड का सख्त प्रावधान किया गया है।

होटल और अस्पतालों के लिए तय नए मानक

विधेयक में इमारतों की प्रकृति, ऊंचाई और क्षेत्रफल के आधार पर फायर एनओसी (NOC) की बाध्यता तय कर दी गई है। राज्य के आवासीय भवनों में यदि ऊंचाई 12 मीटर से अधिक है या कुल क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर से ज्यादा है, तो फायर एनओसी लेना अनिवार्य होगा। वहीं, चारधाम यात्रा और पर्यटन के केंद्र बने होटल, होमस्टे और रिजॉर्ट के लिए दायरा और कड़ा किया गया है-इनके लिए 9 मीटर से अधिक ऊंचाई या 500 वर्गमीटर फ्लोर एरिया होने पर एनओसी की शर्त लागू होगी।

स्कूल और कॉलेजों पर भी 9 मीटर ऊंचाई या 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल का पैमाना तय हुआ है, जबकि अस्पतालों व नर्सिंग होम के लिए 9 मीटर ऊंचाई अथवा 1,000 वर्गमीटर क्षेत्रफल सीमा रखी गई है। इसमें बेसमेंट, अंडरग्राउंड पार्किंग, अस्थाई शेड और पेट्रोल-डीजल व सीएनजी जैसे ज्वलनशील गोदाम भी शामिल हैं।

इमारत सील करने का मिला सख्त अधिकार

नए कानूनी ढांचे के तहत अग्निशमन विभाग को जमीनी स्तर पर सीधी कार्रवाई की पावर दी गई है। सुरक्षा मानकों में चूक पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान पर 10 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। इसके अलावा, जरूरी अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कुल लागत का डेढ़ गुना तक जुर्माना वसूलने की व्यवस्था की गई है।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान गंभीर खामी दिखने पर भवन को तुरंत खाली कराने और परिसर को सील करने का विशेषाधिकार मिल गया है। महानिदेशक से लेकर स्टेशन अधिकारियों तक का प्रशासनिक ढांचा तय करते हुए विभाग को नियमित जांच, पूर्व-निगरानी और कर्मचारियों के विशेष प्रशिक्षण का जिम्मा सौंपा गया है, ताकि किसी भी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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