देहरादून। उत्तराखंड के दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के चार प्रमुख जिलों—अल्मोड़ा, रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर), पिथौरागढ़ और हरिद्वार को नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए ‘अल्पसेवित’ और ‘आकांक्षी’ श्रेणी में रखा गया है।
केंद्र सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन जिलों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जहां फिलहाल कोई सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज मौजूद नहीं है। उत्तराखंड एक विशेष श्रेणी का राज्य है, इसलिए यहां बुनियादी ढांचे के विकास के लिए होने वाले खर्च का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि राज्य को केवल 10 प्रतिशत हिस्सा देना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सदन में जानकारी दी कि मौजूदा जिला और रेफरल अस्पतालों को अपग्रेड कर नए मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं। योजना के तीसरे चरण के तहत उत्तराखंड को न केवल नए कॉलेज मिलेंगे, बल्कि मौजूदा संस्थानों में एमबीबीएस और स्नातकोत्तर (PG) सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए भी वित्तीय मदद दी जाएगी।

सरकार ने अब प्रति मेडिकल सीट की अधिकतम लागत को बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दिया है। इस फंडिंग का लाभ उठाकर राज्य सरकार ने 5000 अतिरिक्त पीजी सीटें और 5023 नई एमबीबीएस सीटें सृजित करने का लक्ष्य रखा है। उत्तराखंड सरकार से इस संबंध में एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) मांगी गई है, जिसमें ग्रामीण और विकास की मुख्यधारा से कटे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी रहती है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश भर में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए 43 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है, जिसमें उत्तराखंड के इन प्रस्तावित कॉलेजों का संचालन राज्य की स्वास्थ्य रैंकिंग को सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा।








