हेल्थ डेस्क, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। भारत के हर हिस्से में उगाई जाने वाली तोरई (Ridge Gourd) केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपने भीतर गंभीर बीमारियों को जड़ से मिटाने की क्षमता रखती है।
मामले में नेनुए के समान दिखने वाली (Medicinal Benefits Of Ridge Gourd) यह सब्जी ठंडी और तर प्रकृति की होती है, जो शरीर की गर्मी और जलन शांत करने में माहिर है।
पथरी और गांठों पर सीधा प्रहार
अगर आप किडनी स्टोन यानी पथरी की समस्या से जूझ रहे हैं, तो तोरई की बेल एक चमत्कारिक दवा साबित हो सकती है। तोरई की बेल को गाय के दूध या ठंडे पानी में अच्छी तरह घिस लें और लगातार 3 दिनों तक सुबह खाली पेट इसका सेवन करें।
माना जाता है कि इससे पथरी गलकर बाहर निकलने लगती है। वहीं, शरीर पर मौजूद फोड़े की गांठ को खत्म करने के लिए तोरई की जड़ को ठंडे पानी में घिसकर उस जगह पर लगाएं; यह महज 24 घंटे में अपना असर दिखाना शुरू कर देती है।
त्वचा रोग और बवासीर में राहत
त्वचा पर उभरने वाले चकत्तों के लिए तोरई की बेल को गाय के मक्खन में घिसकर दिन में दो-तीन बार लगाना फायदेमंद है।
पेट की गड़बड़ी और कब्ज से परेशान मरीजों के लिए तोरई का सेवन किसी वरदान से कम नहीं, क्योंकि यह पाचन तंत्र को सुचारू कर बवासीर (Piles) में राहत देती है।
दर्दनाक मस्सों के इलाज के लिए कड़वी तोरई के पानी में पके हुए बैंगन को घी में भूनकर गुड़ के साथ खाने से पीड़ादायक मस्से झड़ने लगते हैं।

आंखों की रोशनी और बालों की चमक
आंखों में होने वाले रोहे या फूले की समस्या में तोरई के ताजे पत्तों का रस रामबाण है। इसकी 2-3 बूंदें दिन में कई बार आंखों में डालने से फायदा मिलता है।
वहीं, बालों को कुदरती रूप से काला करने के लिए तोरई के टुकड़ों को सुखाकर नारियल तेल में 4 दिन तक भिगोकर रखें, फिर इसे उबालकर छान लें। इस तेल की नियमित मालिश सफेद बालों की समस्या को खत्म कर देती है।
पीलिया और अन्य गंभीर रोगों का समाधान
पीलिया (Jaundice) के मरीजों के लिए कड़वी तोरई का रस एक संजीवनी की तरह काम करता है। इसकी मात्र दो-तीन बूंदें नाक में डालने से नाक के जरिए पीला पानी बहने लगता है और बीमारी का असर कम हो जाता है।
इसके अलावा, गठिया के मरीजों को तोरई, पालक और मेथी जैसी सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए ताकि घुटनों के दर्द में सुधार हो सके। कुष्ठ रोग में इसके पत्तों या बीजों का लेप काफी राहत पहुंचाता है।
चेतावनी: जहाँ तोरई के अनेक फायदे हैं, वहीं इसके अत्यधिक सेवन से कफ और वात की समस्या बढ़ सकती है।
यह पचने में भारी होती है, इसलिए वर्षा ऋतु में बीमार व्यक्तियों को इसका सेवन सावधानीपूर्वक और सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।










