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देहरादून के बहुचर्चित आर्किड पार्क घोटाले में बड़ी कामयाबी, बिल्डर राखी मित्तल दुबई में गिरफ्तार

देहरादून के चर्चित 'आर्किड पार्क' प्रोजेक्ट में करोड़ों की धोखाधड़ी कर फरार हुई बिल्डर राखी मित्तल को इंटरपोल ने दुबई में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब राखी के प्रत्यर्पण और उसके फरार पति दीपक मित्तल की गिरफ्तारी की तैयारी में जुट गई है।

देहरादून के बहुचर्चित आर्किड पार्क घोटाले में बड़ी कामयाबी, बिल्डर राखी मित्तल दुबई में गिरफ्तार

HIGHLIGHTS

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई: रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर इंटरपोल ने दुबई में की गिरफ्तारी।
  • 45 करोड़ का घोटाला: 90 फ्लैट खरीदारों के साथ धोखाधड़ी कर साल 2020 में फरार हुआ था बिल्डर दंपति।
  • अगला कदम: दुबई पुलिस की कस्टडी से भारत लाने (Extradition) की कानूनी प्रक्रिया शुरू।

देहरादून, 28 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। पुष्पांजलि इंफ्राटेक के आर्किड पार्क प्रोजेक्ट में करीब 90 निवेशकों के 45 करोड़ रुपये डकारने वाली फरार बिल्डर राखी मित्तल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। देहरादून पुलिस की सिफारिश पर जारी रेड कॉर्नर नोटिस के बाद इंटरपोल ने यह कार्रवाई की है। राखी को फिलहाल दुबई पुलिस की कस्टडी में रखा गया है।

देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि आधिकारिक सूचना प्राप्त होने के बाद राखी मित्तल के भारत प्रत्यर्पण (Extradition) की वैधानिक कार्यवाही शुरू कर दी गई है। हालांकि, मुख्य आरोपी दीपक मित्तल अब भी फरार है, लेकिन पुलिस का मानना है कि पत्नी की गिरफ्तारी के बाद वह जल्द ही कानून के शिकंजे में होगा या आत्मसमर्पण कर सकता है।

सहस्रधारा रोड प्रोजेक्ट और ठगी का जाल

यह मामला साल 2020 का है जब दीपक मित्तल और राखी मित्तल ने अपने पार्टनर राजपाल वालिया के साथ मिलकर सहस्रधारा रोड पर ‘आर्किड पार्क’ नामक हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू किया था। आरोप है कि फ्लैट के नाम पर करीब 45 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इकट्ठा करने के बाद यह दंपति अपने बच्चों के साथ रातों-रात विदेश फरार हो गया। इस मामले में पीड़ितों ने राजपुर थाने सहित विभिन्न थानों में कुल 9 मुकदमे दर्ज कराए थे।

रेड कॉर्नर नोटिस ने बनाया दबाव

लंबे समय तक पुलिस की कार्रवाई धीमी रहने के बाद, जांच एजेंसियों ने दबाव बढ़ाया। पहले जारी किए गए ब्ल्यू कॉर्नर नोटिस को रेड कॉर्नर नोटिस में बदला गया, जिसके बाद इंटरपोल सक्रिय हुआ। एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया था कि दीपक मित्तल ने विदेश भागने से पहले अपनी बेनामी और मुख्य संपत्तियों को शातिराना ढंग से रिश्तेदारों के नाम ट्रांसफर कर दिया था ताकि रिकवरी से बचा जा सके।

सिंडिकेट और पुराना आपराधिक इतिहास

फरार बिल्डर दीपक मित्तल का इतिहास केवल व्यापारिक चूक का नहीं बल्कि संगठित अपराध का भी रहा है। वह पूर्व में गैंगस्टर एक्ट के तहत भी नामजद हो चुका है। साल 2022 में राजपुर थाने में उसके बिजनेस पार्टनर के बेटे आर्यन वालिया ने भी करोड़ों की धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस के अनुसार, दीपक ने कंपनी के बैंक खातों से पैसा निजी खातों में ट्रांसफर करने के लिए एक पूरा सिंडिकेट बनाया हुआ था।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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