दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (1 अक्टूबर) : राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी गठबंधन (INDIA Alliance) की ताजा बैठक के मंच पर पुरानी कड़वाहट भुलाकर सोनिया गांधी और ममता बनर्जी एक-दूसरे के बेहद करीब जरूर नजर आईं, लेकिन 2029 के नेतृत्व को लेकर खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है। टीएमसी सुप्रीमो ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी का हाथ थामकर एकजुटता का संदेश देने की पूरी कोशिश की।
हालांकि, जैसे ही पत्रकारों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अगले आम चुनाव में विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने को लेकर सीधा सवाल दागा, ममता बनर्जी ने कोई स्पष्ट जवाब न देकर बात को कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टाल दिया।
सोनिया गांधी को बैठक में लाने की कवायद और मंच की केमिस्ट्री
बैठक के भीतर दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल साफ नजर आ रहा था। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस साझा रणनीतिक बैठक और प्रेस वार्ता में सोनिया गांधी की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए खुद ममता बनर्जी ने उनसे विशेष आग्रह किया था और वरिष्ठ नेता के तौर पर मार्गदर्शन मांगा था।
मंच पर दोनों साथ बैठी थीं और उनके पास ही एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले भी मौजूद रहीं। यह सियासी नजदीकी तब और स्पष्ट दिखी जब मंच से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी अपनी बात रख रही थीं और बगल में बैठीं सोनिया गांधी ने पीठ थपथपाकर उनका समर्थन किया। इससे पहले जून के घटनाक्रम में भी दोनों नेताओं की गर्मजोशी से मुलाकात की तस्वीरें सामने आ चुकी हैं।
2029 के चेहरे पर चुप्पी और कांग्रेस का अंदरूनी पलटवार

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की है जब पत्रकारों ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री से 2029 लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2029) में राहुल गांधी की अगुवाई को लेकर सवाल किया। ममता ने न तो समर्थन किया और न ही सीधा खंडन। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे इस पर अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तृत बात करेंगी।
ममता के इस पैंतरे पर पश्चिम बंगाल कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी ने फौरन तीखा प्रहार कर दिया। अधीर रंजन ने तंज कसते हुए कहा कि राज्य में चुनावी पराजय झेलने के बाद अब ममता बनर्जी को दिल्ली का रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्षी खेमे के कई नेता पहले भी राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकारने में हिचकते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि केवल राहुल गांधी ही पूरे गठबंधन का स्वाभाविक और प्रभावी नेतृत्व कर सकते हैं।
चुनाव आयोग पर तीखे आरोप, बड़े आंदोलन की चेतावनी
संसदीय राजनीति के इस शह-मात के खेल के बीच तृणमूल प्रमुख ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप जड़ दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव तंत्र का दुरुपयोग करके सरकारें बनाई हैं। मतगणना में धांधली और ईवीएम में गड़बड़ी का दावा करते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के फौरन इस्तीफे की मांग की। ममता बनर्जी ने चेतावनी भरे लहजे में दो टूक कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो विपक्ष सड़क से लेकर संसद तक ‘मिट्टी से आसमान तक’ बड़ा देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगा।









