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PM Modi Diwali in Bastar : कभी खौफ का गढ़ रहे बस्तर में मनी दीवाली, 15 साल में 88 फीसदी घटी नक्सली हिंसा

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 08 Nov 2026 02:43 PM IST

बस्तर के करनपुर कैंप में पीएम मोदी ने जवानों संग दीवाली मनाई। संसद में रखे गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 15 साल में नक्सली हिंसा 88 फीसदी घट गई है।

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मुख्य बातें

  • पीएम नरेंद्र मोदी ने बस्तर के करनपुर कोबरा बेस पर जवानों के साथ दीवाली मनाई।
  • संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार 2010 से 2025 के बीच नक्सली हिंसा 88 फीसदी घटी।
  • वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 2337 नक्सलियों ने सरेंडर किया और 364 नक्सली मारे गए।

रायपुर/दंतेवाड़ा, 8 नवंबर: बस्तर के करनपुर स्थित कोबरा ऑपरेशन बेस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीवाली मनाई। यह वही क्षेत्र है जहां अप्रैल 2010 में दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में हुए बड़े नक्सली हमले में सुरक्षा बलों के 76 जवान शहीद हो गए थे। करीब 16 साल बाद उसी धरती पर पहुंचे प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का हर जिला अब नक्सलवाद के सीधे प्रभाव से मुक्त हो चुका है और पिछले 47 वर्षों में यह पहला मौका रहा जब सीआरपीएफ ने पूरे साल में एक भी जवान नहीं खोया।

संसद में गृह मंत्रालय की ओर से रखे गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश में नक्सली हिंसा की घटनाएं 2010 में 1,936 दर्ज की गई थीं। वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा गिरकर 234 पर आ गया, जो लगभग 15 वर्षों के भीतर करीब 88 फीसदी की गिरावट दर्शाता है। इसी समयावधि में आम नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों की कुल मौतें 1,005 से घटकर 100 रह गईं।

15 साल में 1936 से 234 पर सिमटे नक्सली हमले

गृह मंत्रालय के दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच देश में 17,542 नक्सली घटनाएं हुई थीं, जिनमें 1,913 सुरक्षा कर्मी और 5,019 नागरिक मारे गए। उस दौर में मारे जाने वाले नक्सलियों के मुकाबले सुरक्षा बलों की शहादत का अनुपात कहीं अधिक रहता था। इसके उलट वर्ष 2025 के आंकड़ों में सुरक्षा बलों ने 364 नक्सलियों को मार गिराया, 1,022 को गिरफ्तार किया और 2,337 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण का यह आंकड़ा अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक रिकॉर्ड है।

बिंदु वर्ष 2010 वर्ष 2025
हिंसक घटनाएं 1,936 234
कुल मौतें (नागरिक व जवान) 1,005 100
प्रभावित पुलिस थाने 465 119
प्रभावित जिले (2018 vs 2025) 126 8

भौगोलिक स्तर पर भी हिंसा का क्षेत्र तेजी से घटा है। साल 2010 में जहां देश के 465 पुलिस थानों के दायरे में नक्सली वारदातें दर्ज होती थीं, वहीं 2025 में यह दायरा घटकर 119 थानों तक सीमित हो गया। वर्ष 2018 में देश के 126 जिले नक्सल प्रभावित श्रेणी में सूचीबद्ध थे, जिनकी संख्या दिसंबर 2025 में घटकर केवल 8 रह गई थी। केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2024 को देश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए 31 मार्च 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसकी समयसीमा पूरी होने के बाद बस्तर में यह पहला बड़ा आयोजन हुआ।

जंगलों से खात्मा लेकिन वैचारिक खतरे पर सतर्कता जरूरी

समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, राज्य पुलिस, बस्तर फाइटर्स और महिला कमांडो के योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री 2014 में सियाचिन, 2018 में उत्तराखंड के हर्षिल और 2024 में कच्छ में जवानों के बीच पर्व मना चुके हैं। इस बार सीमांत चौकियों के बजाय बस्तर के अग्रिम बेस को चुना गया।

संबोधन में प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि भले ही जंगलों के भीतर से सशस्त्र कैडर का प्रभाव खत्म कर दिया गया हो, लेकिन वैचारिक और दिमागी स्तर पर सक्रिय तत्वों से सुरक्षा बलों को लगातार चौकस रहने की आवश्यकता है। अभियान के अगले चरण में सुरक्षा बल इन इलाकों में स्थायी प्रशासनिक ढांचे और सड़कों के नेटवर्क को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित रख रहे हैं।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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