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अब स्कूलों से 500 मीटर दूर खुलेंगी नई शराब दुकानें, बंगाल सरकार का कड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल में नई शराब दुकानों के लिए आबकारी नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। शहरी क्षेत्रों में स्कूल और मंदिरों से 500 मीटर तथा ग्रामीण इलाकों में 1 किमी की दूरी तय की गई है।

West Bengal Liquor Policy

HIGHLIGHTS

  • शहरों में स्कूल-मंदिर से नई शराब दुकान की दूरी 500 मीटर तय।
  • ग्रामीण और गैर-नगरपालिका क्षेत्रों में एक किलोमीटर का दायरा अनिवार्य।
  • संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से चल रही 4000 दुकानों पर असर नहीं।
  • विवादों या सरेंडर के कारण बंद पड़ी करीब 300 दुकानें खुलेंगी।
  • किसी भी मॉल में दुकान शिफ्ट करने पर दूरी का नियम लागू नहीं होगा।

दून हॉराइज़न, कोलकाता (01 अक्टूबर) : पश्चिम बंगाल में आबकारी विभाग (Excise Department) ने नई शराब दुकानों के आवंटन को लेकर नियमों का दायरा काफी कड़ा कर दिया है। राज्य सरकार की ताजा अधिसूचना के मुताबिक अब शहरी व नगरपालिका क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थलों से 500 मीटर के भीतर शराब की कोई नई खुदरा दुकान नहीं खोली जा सकेगी। पुराने प्रावधानों में यह सीमा 1,000 फीट यानी लगभग 300 मीटर हुआ करती थी, जिसे अब 200 मीटर और बढ़ा दिया गया है।

ग्रामीण इलाकों में 1 किलोमीटर का दायरा, मॉल के लिए विशेष राहत

ग्रामीण और गैर-नगरपालिका क्षेत्रों के लिए प्रशासन ने नियम को दोगुना सख्त किया है। वहां स्कूल, कॉलेज और पूजा स्थलों से कम से कम एक किलोमीटर की दूरी पर ही नई शराब दुकान को एनओसी (NOC) या लाइसेंस मिलेगा। राज्य शराब संघ के सचिव बिजन पात्रा ने स्पष्ट किया कि कोलकाता नगर निगम (Kolkata Municipal Corporation) सहित सभी शहरी निकायों में 500 मीटर का फॉर्मूला सख्ती से लागू रहेगा।

नियमों में एक पेच भी है। यदि कोई वर्तमान शराब कारोबारी अपनी दुकान को किसी भी आकार के शॉपिंग मॉल में स्थानांतरित करना चाहता है, तो उस पर दूरी संबंधी ‘नियम 8’ की यह बंदिश लागू नहीं होगी।

4 हजार पुरानी दुकानों पर रोक नहीं, बंद पड़ी 300 दुकानें फिर खुलेंगी

राज्य में वर्तमान में 6,500 से अधिक शराब की दुकानें संचालित हैं। इनमें से लगभग 4,000 दुकानें, ऑफ-शॉप और बार पहले से ही इन संवेदनशील क्षेत्रों के 1 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। आबकारी विभाग ने साफ किया है कि नया नियम केवल नए आवेदनों पर प्रभावी होगा। पुरानी चल रही किसी भी दुकान को हटाने या बंद करने की बाध्यता नहीं है।

इधर, कानूनी विवादों, लाइसेंस सरेंडर या प्रशासनिक अड़चनों के चलते लंबे समय से बंद पड़ी लगभग 300 दुकानों को कुछ तय शर्तों के साथ दोबारा शुरू करने की अनुमति दे दी गई है। इसके लिए आबकारी अधिनियम की धारा 4P के तहत बार के जरिए ऑफ-शॉप खोलने का रास्ता भी निकाला गया है। हालांकि, रिटेलर्स एसोसिएशन के कुछ सदस्यों का मानना है कि राज्य एजेंसी का तय मार्जिन होने से इस मॉडल में कारोबारियों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है।

Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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