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पूर्व PM देवगौड़ा से करवाई थी उत्तराखंड राज्य की घोषणा! जानिए कौन थे जुझारू नेता नवनीत गुंसाई?

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 16 Jul 2026 07:39 PM IST

उत्तराखंड आंदोलन के वरिष्ठ नेता नवनीत गुंसाई को देहरादून के शहीद स्थल पर भारी भीड़ ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कचहरी चौराहे का नाम उनके नाम पर रखने की मांग उठाई।

पूर्व PM देवगौड़ा से करवाई थी उत्तराखंड राज्य की घोषणा! जानिए कौन थे जुझारू नेता नवनीत गुंसाई?

मुख्य बातें

  • शहीद स्थल पर उमड़ी भारी भीड़
  • देवगौड़ा से कराई थी राज्य निर्माण की घोषणा
  • कचहरी चौराहे का नाम बदलने की मांग उठी
  • आरक्षण आंदोलन के 32वें दिन अनशन जारी

देहरादून, 16 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

वरिष्ठ उत्तराखंड आन्दोलनकारी नवनीत गुंसाई को आज देहरादून के शहीद स्थल पर नम आँखों से श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में विभिन्न विचारधाराओं के लोग, आन्दोलनकारी, राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि और महिला संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में एकत्रित हुए।

श्रद्धांजलि सभा हॉल में आयोजित की गई थी। भीड़ इतनी अधिक थी कि शहीद स्थल खचाखच भर गया और कई लोगों को बाहर खड़ा रहना पड़ा।

नवनीत गुंसाई राष्ट्रीय उत्तराखण्ड पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष और उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद के संरक्षक थे। वे उत्तराखंड राज्य निर्माण आन्दोलन के एक जुझारू और वरिष्ठ नेता माने जाते थे। राज्य आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने जनमुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में नवनीत गुंसाई ने टिहरी क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें 10 हजार से अधिक वोट मिले थे।

जनता दल में रहते हुए नवनीत गुंसाई ने अपने साथियों के साथ उत्तराखंड निर्माण में सीधे तौर पर हस्तक्षेप किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से उत्तराखंड राज्य निर्माण की घोषणा करवाने में उनकी अहम भूमिका रही।

राज्य बनने के बाद नवनीत गुंसाई जनविरोधी और विकास विरोधी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरते रहे। वे हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे और साम्प्रदायिक तत्वों का खुलकर विरोध करते थे। हाल ही में झण्डा बाजार क्षेत्र में अल्पसंख्यकों पर हुए हमले के खिलाफ उन्होंने मुखर होकर आवाज उठाई थी।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने कचहरी के पास स्थित चौराहे का नाम नवनीत गुंसाई के नाम पर रखने की मांग स्थानीय प्रशासन के सामने रखी। सभा का संयुक्त संचालन आयूपी के केन्द्रीय महामंत्री बालेश बबानिया, उत्तराखंड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार, प्रवक्ता चिन्तन सकलानी और बरिष्ठ राज्य आन्दोलनकारी अम्बुज शर्मा ने किया।

दूसरी तरफ शहीद स्मारक पर 15 जून से एक अलग धरना भी चल रहा है। राज्य आंदोलनकारीयों को राज्याधीन सेवाओं में 10% क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान लागू होने के बावजूद दो वर्षों से नियुक्ति नहीं मिल पाई है।

इस धरने के 32वें दिन क्रमिक अनशन में पंकज रावत और राम किशन बैठे। आन्दोलनकारियों ने सरकार पर नियुक्ति प्रक्रिया में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में यूकेडी के केन्द्रीय महामंत्री लताफत हुसैन, सीपीएम सचिव अनन्त आकाश और केन्द्रीय प्रवक्ता राजेश शर्मा ने गुंसाई के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। नेताजी संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रभात डण्डरियाल और वरिष्ठ राज्य आन्दोलनकारी पूरणसिंह लिंगवाल भी शहीद स्थल पर मौजूद रहे।

जनवादी महिला समिति की उपाध्यक्ष इन्दु नौडियाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अमित परमार और शिव प्रसाद देवली ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हिस्सा लिया। किसान सभा के उपाध्यक्ष सुरेंद्र सजवाण, उत्तराखंड आन्दोलनकारी मंच के प्रवक्ता सुभागा फर्सवाण और प्रदीप कुकरेती ने नवनीत गुंसाई के संघर्षों को याद किया।

सीपीएम के राज्य सचिव मोहनसिंह रावत, राजेंद्र पुरोहित, विवेक खण्डूरी और बीरेंद्र पोखरियाल कार्यक्रम में शामिल हुए। डीएवी महाविद्यालय के पूर्व छात्र संघ नेता लेखराज ने युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व किया।

शोक सभा में केशव उनियाल, रामपाल सिंह, रमेंश रतूडी और अभिनेता बबीता अनन्त ने शिरकत की। निशा मस्ताना, धर्मानंद भट्ट, भगतसिंह अनुराधा, एआईएलयू महामंत्री शम्भूपसाद ममगाई और नुरैशा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

शाकुम्भरी रावत, शम्भुपसाद भट्ट, नरेंद्र नौटियाल, पुष्पा रावत, मीरा गुंसाई और विनोद कटारिया ने शहीद स्थल पर मौन रखा।

जगमोहन सिंह नेगी, प्रदीप कुकरेती, जयदीप सकलानी, सतेंद्र भंडारी, गणेश डंगवाल और निर्मला बिष्ट ने गुंसाई के निधन को राज्य के लिए बड़ी क्षति बताया। पंकज सिंह रावत, लुसुन टोडरिया, आनंद सिंह, शांति तड़ियाल और प्रेम सिंह नेगी ने भी शोक संवेदना व्यक्त की।

हरिप्रकाश शर्मा, सुरेश नेगी, अनुराधा मैंदोला और आरिफ़ वारसी ने नवनीत गुंसाई को याद किया। राज्य आन्दोलनकारी मंच से पारूल बिष्ट, आनन्द सिंह तडियार, बिजय पाह्ववा और बलबीर सिंह नेगी उपस्थित थे।

भगवन्त पयाल, रविंद्र नौडियाल, सीटू से कृष्ण गुनियाल, अरूणा थपलियाल और रंगकर्मी सतीश धौलाखण्डी ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। जेडीएस अध्यक्ष हरजिन्दरसिंह और महिला मंच की उपाध्यक्ष निर्मला बिष्ट ने पुष्पांजलि अर्पित की।

कल्पेश्वरी, पुष्पलता वैश्य, सुशीला चन्दोला, वरिष्ठ राज्य आन्दोलनकारी ओमी उनियाल, पूर्णा ध्यानी, लोकबहादुर थापा और शक्ति तडियाल मौके पर मौजूद रहे। एडवोकेट प्रियंका रानी, तारा पाण्डेय, सुलोचना भट्ट, मुकेश मोधा और लक्ष्मीदेवी ने शोक जताया।

इन्द्रादेवी, कमलेश, गंगा देवी, सोनी नेगी, रमेंश रावत, विमला रावत और मायादेवी श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों की कतार में खड़े थे। अजय तिवारी, यशोदा ममगाई, राजदुलारी लोधा, राजेश्वरी, आशा बिष्ट और कमला राणा ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

डा. मंजूबाला, गुरूप्रसाद, सुरेशी, पंकज सिंह, अल्का, इकबाल, आशा डंगवाल, गौरादेवी और एडवोकेट दुर्गा ध्यानी रतूडी ने अपनी उपस्थिति से गुंसाई के प्रति सम्मान प्रकट किया।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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