देहरादून (24 अक्टूबर) : उत्तराखंड के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में लंबे समय से खाली चल रहे पदों को भरने के लिए शासन स्तर पर प्रक्रिया तेज कर दी गई है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि राज्य के विभिन्न जनपदों में बेसिक शिक्षकों के 400 से अधिक पद खाली पड़े हैं, जिन्हें भरने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इस फैसले से उन ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के स्कूलों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जहां शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
समायोजन नीति से सुधरेगा छात्र-शिक्षक अनुपात
बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि कई विद्यालय ऐसे हैं जहां छात्र संख्या बेहद कम है, लेकिन वहां जरूरत से ज्यादा शिक्षक तैनात हैं। ऐसे स्कूलों की पहचान कर वहां कार्यरत अतिरिक्त शिक्षकों को उन विद्यालयों में भेजा जाएगा जहां छात्र संख्या अधिक है लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। इस प्रशासनिक कदम से न केवल संसाधनों का सही उपयोग हो सकेगा, बल्कि दूरदराज के इलाकों में बच्चों की पढ़ाई पटरी पर लौट सकेगी। इसके साथ ही राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया को भी तेजी से पूरा करने के आदेश दिए गए हैं ताकि प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत हो सके।
खेल मैदानों के लिए खेल विभाग संग एमओयू
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक नया खाका तैयार किया गया है। योजना के तहत प्रदेश के प्रत्येक जनपद के ब्लॉक स्तर पर एक-एक विद्यालय में खेल मैदान का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग अपने परिसरों में भूमि उपलब्ध कराएगा और जल्द ही खेल एवं युवा कल्याण विभाग के साथ एक एमओयू साइन किया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि धरातल पर काम तेजी से शुरू हो सके।
पारदर्शी प्रक्रिया और अगली प्रशासनिक कार्रवाई
विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाएं और भूमि-पूजन, शिलान्यास तथा लोकार्पण के कार्यों को समय पर पूरा करें। बैठक में शिक्षा सचिव ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोण्डे सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार के इस कदम से आने वाले दिनों में बेसिक शिक्षा और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिस पर अभिभावकों और बेरोजगार युवाओं की निगाहें टिकी हैं।




