ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम बिज़नेस खेल मनोरंजन ऑटो गैजेट्स धर्म राशिफल आज का पंचांग
हेल्थ लाइफस्टाइल करियर ट्रेंडिंग

Sarson Ka Saag Recipe : पंजाबी स्टाइल सरसों का साग, जानें इसे बनाने का असली तरीका

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Wed, 04 Nov 2026 11:13 PM IST

सर्दियों का खास पंजाबी सरसों का साग, जिसे पालक और बथुआ मिलाकर बनाया जाता है। सही तरीके से घोटकर बनाने से यह एकदम असली और दानेदार बनता है।

Authentic punjabi sarson ka saag recipe served in a traditional bowl with makki ki roti and white butter.

मुख्य बातें

  • तैयारी में 20 मिनट और पकने में लगभग 40 मिनट लगते हैं।
  • सरसों, पालक और बथुआ का 2:1:1 अनुपात हमेशा बनाए रखें।
  • मक्के के आटे का 'आलन' साग को पानी छोड़ने से रोकता है।
  • असली स्वाद के लिए मिक्सी की जगह मथानी से घोटें।

Sarson Ka Saag Recipe : सर्दियों की ठंडी हवाओं के साथ ही रसोई में सरसों के साग की महक उठने लगती है। यह सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि उत्तर भारत, खास तौर पर पंजाब की सर्दियों का एक पारंपरिक जश्न है। घर के चूल्हे या गैस पर भी वह ढाबे वाला असली स्वाद लाया जा सकता है, बशर्ते आप इसे बनाने के कुछ पुराने और बुनियादी तरीके अपनाएं।

सरसों का साग के लिए सामग्री (4 लोगों के लिए)

  • सरसों के पत्ते: 500 ग्राम (मोटे डंठल हटाए हुए)
  • पालक: 250 ग्राम
  • बथुआ: 250 ग्राम
  • अदरक: 2 इंच टुकड़ा (बारीक कटा हुआ)
  • लहसुन: 10-12 कलियां (बारीक कटी हुई)
  • हरी मिर्च: 3-4 (स्वादानुसार बारीक कटी हुई)
  • मक्के का आटा (आलन): 3-4 बड़े चम्मच
  • देसी घी: 3 से 4 बड़े चम्मच
  • प्याज: 2 मध्यम आकार के (बारीक कटे हुए)
  • सूखी लाल मिर्च: 2-3
  • हींग: 1/4 छोटी चम्मच
  • नमक: स्वादानुसार

सरसों का साग बनाने का तरीका

  1. पत्ते साफ करना और धोना: सरसों, पालक और बथुआ के पत्ते जमीन के करीब उगते हैं, इसलिए इनमें काफी मिट्टी होती है। इन्हें काटने से पहले एक बड़े बर्तन में पानी भरकर 10 मिनट के लिए डुबो दें ताकि मिट्टी नीचे बैठ जाए। इसके बाद इन्हें 3-4 बार साफ पानी से धोकर बारीक काट लें।
  2. कुकर में उबालना: एक प्रेशर कुकर में कटे हुए सभी पत्ते, आधा कटा हुआ अदरक, आधा लहसुन, हरी मिर्च, नमक और आधा कप पानी डालें। कुकर बंद करके मध्यम आंच पर 2 सीटी लगाएं। इसके बाद आंच को एकदम धीमा कर दें और पत्तों को 10 से 12 मिनट तक पकने दें ताकि वे पूरी तरह से गल जाएं।
  3. मथानी से घोटना: कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें। ढक्कन खोलने के बाद एक लकड़ी की मथानी या घोटनी से साग को अच्छी तरह घोटें। यहीं पर साग का असली टेक्सचर बनता है। मिक्सी का इस्तेमाल न करें। घोटते समय साग को दानेदार रखना है।
  4. आलन (मक्के का आटा) लगाना: साग घोटते समय ही इसमें थोड़ा-थोड़ा करके मक्के का आटा मिलाएं। इसे आलन लगाना कहते हैं। आलन साग के अतिरिक्त पानी को सोख लेता है और उसे गाढ़ा करता है। मक्के का आटा मिलाने के बाद साग को धीमी आंच पर बिना ढक्कन के 12 से 15 मिनट तक पकाएं। पकते समय जब साग का रंग गहरे हरे (ऑलिव ग्रीन) में बदल जाए और उसमें से बुलबुले फूटने की छप-छप आवाज आने लगे, तो समझ लें कि मक्के का आटा पक चुका है।
  5. तड़का तैयार करना: एक कड़ाही में देसी घी गर्म करें। घी पिघलने पर इसमें हींग और सूखी लाल मिर्च डालें। कुछ सेकंड बाद बचा हुआ बारीक कटा लहसुन और अदरक डाल दें। इन्हें हल्का सुनहरा होने तक भूनें ताकि घी में इनका पूरा फ्लेवर आ जाए।
  6. साग को छौंकना: लहसुन भुनने के बाद कड़ाही में बारीक कटा प्याज डालें और गुलाबी होने तक भून लें। अब कुकर में तैयार रखा हुआ साग कड़ाही में पलट दें। इसे अच्छी तरह मिलाएं और 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें ताकि तड़के का स्वाद साग के कोने-कोने में समा जाए।

साग बनाने में होने वाली 3 आम गलतियां और उनके उपाय

सिर्फ सरसों के पत्ते इस्तेमाल करना: कई बार लोग केवल सरसों के पत्तों से साग बना लेते हैं, जिससे वह कड़वा हो जाता है। पालक इसकी कड़वाहट को संतुलित करता है और बथुआ इसे एक सौंधी महक और चिकनाहट देता है। 2:1:1 (सरसों, पालक, बथुआ) का अनुपात हमेशा याद रखें।

थाली में पानी अलग बहना: अगर आपने उबालने के बाद मक्के के आटे का आलन नहीं डाला है, तो परोसते समय साग एक तरफ और उसका पानी दूसरी तरफ बहने लगता है। आलन ही इसे एक साथ बांधकर मखमली टेक्सचर देता है।

मिक्सी में पीसने की जल्दीबाजी: समय बचाने के लिए साग को मिक्सी में पीसने से यह सूप या प्यूरी जैसा बन जाता है। असली स्वाद के लिए इसे घोटनी से ही घोटें। मेहनत थोड़ी ज्यादा लगेगी, लेकिन खाने वाले उंगलियां चाटते रह जाएंगे।

पहाड़ी ‘लाई’ का विकल्प और साग को स्टोर करने का तरीका

अगर आपके इलाके में सरसों के पत्ते आसानी से नहीं मिलते हैं, तो उत्तराखंड की सर्दियों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाली ‘लाई’ (पहाड़ी लाल या हरी सरसों) इसका बेहतरीन विकल्प है। लाई के पत्तों में अपना एक प्राकृतिक तीखापन होता है। जब लाई का साग बनता है, तो उसमें लहसुन और अदरक का तड़का और भी खुलकर सामने आता है।

ज्यादातर ढाबों और घरों में साग को एक बार में बनाकर स्टोर कर लिया जाता है। आप भी उबला और घोटा हुआ साग (बिना घी और प्याज के तड़के वाला) एक एयरटाइट डिब्बे में रखकर फ्रिज में 4 से 5 दिन तक सुरक्षित रख सकते हैं। जब भी खाना हो, बस एक पैन में थोड़ा सा ताजा घी, लहसुन और प्याज भूनें और जरूरत के हिसाब से साग डालकर छौंक लें। इस तरह यह हर बार एकदम ताजा लगेगा।

गरमा-गरम सरसों के साग को कटोरी में निकालें, ऊपर से थोड़ा देसी घी डालें और इसे कुरकुरी मक्के की रोटी, गुड़ की डली व ताजी मूली के सलाद के साथ परोसें।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

Leave a Comment