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उत्तराखंड: देहरादून में खराब राशन पर एक्शन, सरकारी गोदामों में चेकिंग शुरू

देहरादून में राशन की गुणवत्ता को लेकर डीएम डॉ. आशीष चौहान सख्त। एसडीएम करेंगे सरकारी गोदामों की जांच, 7 दिन में तलब की रिपोर्ट। खराब अनाज पर नपेंगे अफसर।

Published On: October 14, 2026 5:47 PM
Uttarakhand Food Grain Inspection

मुख्य बातें

  • कोटेदारों से पहले अब सीधे सरकारी गोदामों की जांच करेंगे एसडीएम।
  • डीएम आशीष चौहान ने अधिकारियों से सात दिन में रिपोर्ट मांगी।
  • गोदाम से सड़ा अनाज निकला तो पूर्ति अफसरों पर होगी कार्रवाई।

देहरादून (14 अक्टूबर) : सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में खराब राशन की शिकायतों पर देहरादून जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। राशन कोटेदारों पर शिकंजा कसने से पहले जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सीधे सप्लाई के स्रोत यानी राजकीय अन्न भंडारों (सरकारी गोदामों) की घेराबंदी कर दी है।

जिले के सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) को खुद गोदामों में जाकर खाद्यान्न की गुणवत्ता जांचने और उचित दर दुकानों पर स्थानीय अफसरों की तैनाती करने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गोदाम के गेट से राशन की दुकान तक केवल साफ और गुणवत्तापूर्ण अनाज ही पहुंचेगा, किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

सरकारी गोदामों में सीधे उतरेगी एसडीएम की टीम

जिलाधिकारी ने जनपद के सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे केवल फाइलों पर निर्भर न रहें, बल्कि खुद फील्ड में उतरकर राजकीय अन्न भंडारों का औचक निरीक्षण करें। गोदामों से उचित दर दुकानों के लिए जो गेहूं और चावल उठाया जा रहा है, उसकी बोरियों की रैंडम सैंपलिंग कर गुणवत्ता परखी जाएगी।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जब तक खाद्यान्न तय सरकारी मानकों पर खरा नहीं उतरता, तब तक उसे कोटेदारों को नहीं सौंपा जाएगा। राशन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए प्रत्येक उचित दर दुकान की निगरानी का जिम्मा भी स्थानीय अधिकारियों को सौंपा जा रहा है, जो वितरण के समय दुकानों पर मौजूद रहकर व्यवस्था देखेंगे।

सड़े राशन का ठीकरा अब गोदाम पर नहीं फूटेगा

जमीनी हकीकत यह रही है कि जब भी किसी सस्ते गल्ले की दुकान पर घुन लगा, सीलन भरा या सड़ा अनाज पकड़ा जाता था, तो कोटेदार सारा दोष सीधे सरकारी गोदामों पर मढ़ देते थे। उनका दावा होता था कि खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के गोदामों से ही उन्हें खराब माल भेजा गया है। डीएम के इस नए कदम ने इस बहाने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म कर दी है।

जब एसडीएम स्तर के अधिकारी खुद अन्न भंडारों के स्टॉक को प्रमाणित करेंगे, तो सप्लाई चेन में गड़बड़ी करने वाले बिचौलियों और लापरवाह पूर्ति निरीक्षकों पर सीधी गाज गिरेगी। इसके साथ ही उचित दर दुकानों में अनाज के सुरक्षित भंडारण और साफ-सफाई को लेकर भी कड़े मानक तय कर दिए गए हैं।

सात दिन में डीएम को सौंपनी होगी पूरी रिपोर्ट

सार्वजनिक वितरण प्रणाली को चाक-चौबंद करने के लिए प्रशासन ने सख्त समयसीमा तय की है। जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों के गोदामों और कोटे की दुकानों का सघन निरीक्षण पूरा कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत आख्या जिला मुख्यालय को भेजें।

इस रिपोर्ट में यह दर्ज होगा कि कितने गोदामों की जांच हुई, खाद्यान्न की गुणवत्ता कैसी पाई गई और दुकानों में साफ-सफाई के क्या इंतज़ाम हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत मिलने वाले सस्ते राशन में किसी भी तरह की मिलावट या घटिया अनाज पाए जाने पर संबंधित केंद्र प्रभारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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