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उत्तराखंड के 600 नर्सिंग छात्रों को सिखाई जाएगी विदेशी भाषा, विदेशों में मिलेगी नौकरी

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Wed, 14 Oct 2026 04:54 PM IST

उत्तराखंड में 600 नर्सिंग छात्रों और स्कूली बच्चों को विदेशी भाषा सिखाई जाएगी। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में सेंटर खोलकर ग्लोबल जॉब से जोड़ने के निर्देश दिए।

Uttarakhand Foreign Language Training

मुख्य बातें

  • सरकारी नर्सिंग के 600 छात्रों को विदेशी भाषा प्रशिक्षण मिलेगा।
  • अटल उत्कृष्ट और नवोदय स्कूलों में विदेशी भाषा पाठ्यक्रम जुड़ेगा।
  • देहरादून मॉडल का विस्तार कर सभी जिलों में सेंटर खुलेंगे।

देहरादून (14 अक्टूबर) : उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे करीब 600 नर्सिंग छात्रों के साथ-साथ अटल उत्कृष्ट और राजीव नवोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों को अब विदेशी भाषाओं का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस पूरी योजना को मिशन मोड पर लागू करने के लिए कार्मिक और वित्त विभाग को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के कड़े निर्देश दिए हैं। सरकार का सीधा फोकस जर्मनी, जापान और खाड़ी देशों के हेल्थकेयर सेक्टर में उत्तराखंड के युवाओं की सीधी एंट्री कराना है।

नर्सिंग छात्रों को विदेशी भाषा से मिलेगा रोजगार

प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में इस समय करीब 600 छात्र प्रशिक्षण ले रहे हैं। वैश्विक स्तर पर, खासकर यूरोपीय देशों और जापान में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की भारी मांग है, लेकिन विदेशी भाषा न आना भारतीय युवाओं के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बनता रहा है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि नर्सिंग के मूल पाठ्यक्रम के साथ ही इन छात्रों को जर्मन, जापानी और फ्रेंच जैसी प्रमुख विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाए।

इससे डिग्री पूरी होते ही युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाखों के पैकेज वाली नौकरियों के सीधे अवसर मिल सकेंगे। इसके अलावा आईटीआई और पैरामेडिकल से जुड़े युवाओं को भी इस कौशल विकास का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं के लिए सीमाओं के पार रोजगार के रास्ते खुलें।

पायलट प्रोजेक्ट के बाद सभी जिलों में विस्तार

कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग अब तक देहरादून, अल्मोड़ा और बागेश्वर में विदेशी भाषा प्रशिक्षण का पायलट प्रोजेक्ट चला रहा था। इन तीन जिलों में मिले सकारात्मक रुझान के बाद अब इस मॉडल को राज्य के सभी 13 जनपदों में लागू करने का फैसला हुआ है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि हर जिले में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तर्ज पर आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएं।

ये कक्षाएं केवल पारंपरिक क्लासरूम तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि दूर-दराज के पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं को जोड़ने के लिए हाइब्रिड और ऑनलाइन मोड पर भी संचालित होंगी। स्कूल स्तर पर भी नींव मजबूत करने के लिए शिक्षा विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह प्रदेश के सभी अटल उत्कृष्ट और राजीव नवोदय विद्यालयों में अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य विदेशी भाषाओं के बैच शुरू करे।

वैश्विक प्लेसमेंट के लिए बनेगा मजबूत प्रशासनिक तंत्र

भाषा प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए दून विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा संकाय के सीनियर विद्यार्थियों और विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। इन प्रशिक्षकों को शिक्षण के बदले बाकायदा शैक्षणिक क्रेडिट और प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। शासन स्तर पर यह भी तय किया गया है कि केवल भाषा सिखाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाणपत्र दिलाए जाएंगे।

इसके लिए अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट एजेंसियों और संबंधित दूतावासों के साथ निरंतर समन्वय बनाया जाएगा। बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, विनय शंकर पाण्डेय, ज्योति यादव, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल और अपर सचिव मनुज गोयल मौजूद रहे।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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