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धामी सरकार का बड़ा फैसला, दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को मिले ₹5-₹5 लाख

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 25 Oct 2026 02:21 PM IST

उत्तराखंड में पत्रकार कल्याण कोष से दिवंगत परिजनों को ₹5 लाख की मदद, एक को इलाज हेतु सहायता और 4 वरिष्ठ पत्रकारों को ₹8000 मासिक पेंशन की संस्तुति हुई।

uttarakhand journalist welfare

मुख्य बातें

  • चार दिवंगत पत्रकारों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये की सहायता संस्तुति।
  • गंभीर बीमारी से जूझ रहे वरिष्ठ पत्रकार को इलाज हेतु 5 लाख।
  • चार वरिष्ठ पत्रकारों को 8,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन देने पर मुहर।

देहरादून (25 अक्टूबर) : उत्तराखंड सरकार ने फील्ड में जोखिम उठाकर काम करने वाले पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए कुल 25 लाख रुपये की एकमुश्त राहत और आजीवन मासिक पेंशन की संस्तुति की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में चार दिवंगत पत्रकारों के बेसहारा परिजनों को 5-5 लाख रुपये, गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक वरिष्ठ पत्रकार को उपचार हेतु 5 लाख रुपये तथा चार वरिष्ठ पत्रकारों को 8,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन देने का रास्ता साफ किया गया।

दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को मिली बड़ी आर्थिक राहत

सूचना निदेशालय में आयोजित पत्रकार कल्याण कोष (कॉरपस फंड) की बैठक में समिति ने संकटग्रस्त परिवारों की फाइलों पर सीधे निर्णय लिया। फील्ड में आकस्मिक जान गंवाने वाले चार पत्रकारों के आश्रितों को जीवनयापन के लिए 5-5 लाख रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता की संस्तुति की गई है। इसके अलावा, असाध्य और गंभीर बीमारी की चपेट में आए एक वरिष्ठ पत्रकार के महंगे इलाज के लिए भी 5 लाख रुपये का विशेष चिकित्सा अनुदान स्वीकृत किया गया। सूचना महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि आर्थिक तंगी के चलते किसी भी मीडियाकर्मी का इलाज नहीं रुकेगा और राशि सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाएगी।

वरिष्ठ पत्रकारों के लिए आठ हजार रुपये मासिक पेंशन

बैठक का दूसरा अहम पहलू लंबे समय तक सक्रिय पत्रकारिता कर चुके वयोवृद्ध मीडियाकर्मियों को सम्मानजनक बुढ़ापा देना रहा। मुख्यमंत्री पत्रकार सम्मान पेंशन योजना के तहत समिति ने चार वरिष्ठ पत्रकारों के आवेदनों की पात्रता जांचने के बाद उन्हें 8,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन देने की संस्तुति की।

बिना किसी नियमित पेंशन या ग्रेच्युटी के दशकों तक समाज को खबरें देने वाले पत्रकारों के लिए यह राशि नियमित मासिक संबल का काम करेगी। समिति ने यह भी तय किया कि पेंशन के अन्य लंबित आवेदनों के दस्तावेजों का सत्यापन तेज किया जाए ताकि पात्र बुजुर्ग पत्रकारों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

सूचना निदेशालय में पारदर्शी प्रक्रिया से मंजूर हुई राहत

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पत्रकार कल्याण से जुड़े मामलों में लालफीताशाही पूरी तरह खत्म होनी चाहिए। समिति की बैठकें तय अंतराल पर नियमित रूप से आयोजित होंगी ताकि किसी भी आकस्मिक विपदा में पीड़ित परिवार को हफ्तों इंतजार न करना पड़े।

बैठक में सूचना विभाग के अपर निदेशक आशीष कुमार त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक के.एस. चौहान, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी चंद्र सिंह तोमर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी चेतन कुमार पाण्डेय के अलावा पत्रकार कल्याण कोष समिति के गैर-सरकारी सदस्य गिरीश तिवारी, अमित शर्मा और शशि शर्मा मौजूद रहे।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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