मुख्यमंत्री ने 'पैन-अरुणाचल'' की अवधारणा पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने 'पैन-अरुणाचल'' की अवधारणा पर दिया जोर


इटानगर, 10 मई (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने राज्य के समग्र विकास और अपने लोगों के कल्याण के लिए एकमात्र मंत्र के रूप में 'पैन-अरुणाचल'' की अवधारणा पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि हर जनजाति और राज्य के हिस्से को ध्यान में रखते हुए सपने देखना और मिलकर काम करना ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।

राज्य के युवा मामलों के विभाग द्वारा चांगलांग जिला के जयरामपुर में आयोजित पहले 'अरुणाचल युवा समन्वय' समापन समारोह में भाग लेते हुए, मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि पहले स्वयं और जनजाति के लिए सोचने की मौजूदा प्रवृत्ति को उलट दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहले स्वयं के हित को रखने की प्रवृत्ति, फिर आप जिस जनजाति के हैं और अंत में राज्य के बारे में सोचने की प्रवृत्ति को बदलना चाहिए। हमें राज्य का हित पहले, जनजाति आगे और स्वयं को अंतिम में रखना चाहिए। तभी हम एक राज्य के रूप में विकसित होंगे।

खांडू ने समझाया कि राज्य में कई जनजातियां हैं, जो सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे से मीलों दूर हैं। अखिल अरुणाचल की अवधारणा पर योजनाएं आधारित होनी चाहिए ताकि प्रत्येक जनजाति को विकास का समान अवसर मिल सके। उन्होंने कहा, अखिल अरुणाचल की अवधारणा प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर युवाओं से शुरू होनी चाहिए।

छह मई को शुरू हुए अरुणाचल युवा समन्वय की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के सभी 26 जनजातियों के युवाओं ने इसमें भाग लिया। खांडू ने इस कार्यक्रम को राज्य सरकार का वार्षिक कैलेंडर कार्यक्रम बनाने की घोषणा की।

उन्होंने समारोह में मौजूद युवा मामलों के मंत्री मामा नातुंग से अनुरोध किया कि इस संबंध में तत्काल एक प्रस्ताव राज्य मंत्री परिषद को विचारार्थ प्रस्तुत करें।

उन्होंने कहा, “यह हमारे युवाओं के लिए सबसे अच्छा मंच है, जो कल राज्य चलाएंगे, एक-दूसरे के साथ मिलेंगे, एक-दूसरे की संस्कृति को जानेंगे, सम्मान देंगे, भाईचारा विकसित करेंगे और अखिल अरुणाचल की अवधारणा के बीज बोएंगे। विविधता में हमारी एकता को उच्चतम स्तर तक ले जाने के लिए यह एक ठोस मंच होगा।

खांडू ने सुझाव दिया कि प्रत्येक वर्ष राज्य के अलग-अलग हिस्सों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाए, ताकि राज्य के अन्य हिस्सों के युवाओं को अपने राज्य के एक अलग हिस्से और जनजाति का पता करने का अवसर मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यहां लगभग 26 प्रमुख जनजातियां और 100 से अधिक उप-जनजातियां निवास करती हैं। खांडू ने युवाओं को उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों की याद दिलाते हुए कहा कि युवा विकास की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण वाले सशक्त युवा ही अपनी क्षमता का विकास कर सकते हैं और राष्ट्रीय विकास में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं। मुख्यमंत्री प्रतिभा खोज कार्यक्रम के तहत बताया कि राज्य सरकार सालाना चार कार्यक्रमों को प्रायोजित कर रही है - अरुणाचल गॉट टैलेंट, अरुणाचल आइडल, मिस अरुणाचल और मिस्टर अरुणाचल, जो अद्वितीय प्रतिभाओं की पहचान करने और उन युवाओं को सही जगह देने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं। नई तकनीक से लैस सभी धारणाओं को तोड़ने और उन्हें अपने सपनों को जीने के लिए कौशल और संसाधनों के साथ सशक्त बनाने की क्षमता प्रदान करता है।

खांडू ने युवाओं से नशे से दूर रहने और सरकार को इस बुराई को खत्म करने में मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने राज्य के वन और वन्य जीवों के संरक्षण का भी आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा, “अरुणाचल की पहली पहचान हमारी अनूठी संस्कृति है। हमारी दूसरी पहचान है हमारी हरियाली...हमारा पर्यावरण। हां हमें विकास की जरूरत है लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं। दोनों के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखने के लिए युवाओं को यह जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

इस अवसर पर लोकसभा सांसद तापीर गाओ, खेल और युवा मामलों के मंत्री मामा नातुंग, भूविज्ञान और खनन मंत्री कमलुंग मोसांग, विधायक लाईसम सिमाई, सोमलुंग मोसांग और ओजिंग तासिंग आदि उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार /तागू/ अरविंद

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