चीन का ये ड्रोन महीनों तक हवा में रहकर करेगा निगरानी, सैटेलाइट का भी करेगा काम

चीन ने अपने पहले पूर्ण सौर-संचालित मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी या ड्रोन) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है जो महीनों तक उड़ान भर सकता है और आवश्यकता पड़ने पर एक सैटेलाइट के रूप में भी काम कर सकता है. 
चीन का ये ड्रोन महीनों तक हवा में रहकर करेगा निगरानी, सैटेलाइट का भी करेगा काम

बीजिंग: चीन ने अपने पहले पूर्ण सौर-संचालित मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी या ड्रोन) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है जो महीनों तक उड़ान भर सकता है और आवश्यकता पड़ने पर एक सैटेलाइट के रूप में भी काम कर सकता है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सरकार के एक अधिकारी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है.

ट्ववीट में अधिकारी ने लिखा कि Qimingxing-50 ने पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, जिससे यह केवल सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला पहला बड़े आकार का UAV बन गया है.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन ने 3 सितंबर को शाम 5.50 बजे उत्तर-पश्चिमी चीनी प्रांत शानक्सी के एक हवाई अड्डे से उड़ान भरी और शाम 6:16 बजे सुरक्षित रूप से उतरने से पहले लगभग 26 मिनट तक आकाश में बना रहा.

Qimingxing-50, 50 मीटर के पंखों वाला, हाई एल्टीट्यूड पर उड़ने वाला एक लंबा ड्रोन है जो काफी ऊंचाई पर रहकर जासूसी करने में भी सक्षम है. यह ड्रोन जंगल की आग का आकलन कर आंकड़े जुटाता है और इसे संचार के लिए भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है.यह तकनीक अंतरिक्ष और समुद्र में चीनी सुरक्षा को मजबूत करेगी.

खबर के मुताबिक इसका उपयोग रिन्यूएबल एनर्जी और एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में किया जा सकता है, चीनी अधिकारी ने यह भी कहा कि यह परीक्षण उड़ान सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

सैटेलाइट के रूप में आएगा काम

मॉर्निंग स्टार -50 के रूप में प्रचलित इस ड्रोन के बारे में दावा किया जाता है कि यह महीनों तक निर्बाध रूप से काम करने में सक्षम है. लंबी सहनशक्ति वाली उड़ान होने की यह क्षमता इसे सैटेलाइट के रूप में प्रयोग करने के उपयोगी बना देती है. सैटेलाइट की तरह, यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा द्वारा संचालित बिजली से संचालित है और लगातार लंबी अवधि के लिए पृथ्वी की सतह से लगभग 20 किमी ऊपर काम कर सकता है.

इसे ‘हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म स्टेशन’ या सूडो सैटेलाइट के रूप में भी जाना जाता है. सैटेलाइट सेवाओं में अनुपलब्धता या व्यवधान होने पर इसका उपयोग किया जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कक्षा में उपग्रह स्थापित करने की लागत और जटिलता की तुलना में, यह यूएवी अधिक लागत प्रभावी और संचालित करने में आसान है.

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