दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (1 अक्टूबर) : एशियन गेम्स 2026 (Asian Games 2026) के दूसरे सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ टॉस हारकर पहले बैटिंग करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। ओपनर अभिषेक शर्मा एक बार फिर उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे और मैच के पहले ही ओवर में पवेलियन लौट गए।
टीम इंडिया का स्कोर जब महज 12 रन था, तभी बड़ा शॉट खेलने के फेर में वे अपना विकेट गंवा बैठे। उन्होंने 3 गेंदों पर एक छक्के की मदद से 7 रन जरूर बनाए, पर नॉकआउट जैसे अहम मुकाबले में ठोस शुरुआत दिलाने में पूरी तरह नाकाम रहे।
लगातार छठी बार सिंगल डिजिट में सिमटे
अभिषेक के विदेशी रिकॉर्ड पर नजर डालें तो स्थिति काफी चिंताजनक दिखती है। यह लगातार छठा मौका है जब विदेशी जमीन पर वे 10 रन का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। पिछली 6 पारियों में उनका स्कोर 3, 1, 8, 2, 0 और 7 रन रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस बीच जब वे भारत में खेले, तो उन्होंने 82, 38 और 108 रनों की विस्फोटक पारियां खेलकर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन सरहद पार जाते ही उनकी आक्रामकता पर ब्रेक लग जाता है।
गति और उछाल के सामने संघर्ष
आंकड़े साफ बताते हैं कि अभिषेक को विदेशी पिचों की तेजी और सीम मूवमेंट भांपने में खासी दिक्कत पेश आ रही है। घरेलू पिचों पर जहां उन्होंने 27 मैचों में 969 रन जड़े हैं, वहीं विदेशी जमीन पर खेले 26 टी20 मुकाबलों में वे सिर्फ 605 रन ही जुटा पाए हैं। तकनीकी जानकारों की मानें तो गेंद की लाइन में आए बिना रूम बनाकर खेलने की आदत विदेशी तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनके लिए परेशानी का सबब बन रही है। पावरप्ले में फील्ड प्रतिबंधों का फायदा उठाने के चक्कर में वे अक्सर गैर-जरूरी जोखिम ले बैठते हैं।
ओपनिंग स्लॉट पर सवाल
टी20 फॉर्मेट में भारतीय टीम मैनेजमेंट आक्रामक शुरुआत को तवज्जो देता रहा है, लेकिन नॉकआउट मैचों में लगातार शुरुआती विकेट गंवाना महंगा साबित हो सकता है। फिलहाल सेलेक्टर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अभिषेक जैसे आक्रामक बल्लेबाज को तकनीकी सुधार का वक्त दिया जाए या विदेशी दौरों पर वैकल्पिक सलामी बल्लेबाजों को आजमाया जाए।









