दून हॉराइज़न, देहरादून (27 सितंबर) : चुनावी मैदान में लगातार मिल रही पराजय से विचलित कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं की साख पर हमला बोलकर अपना सियासी वजूद बचाने की नाकाम कोशिश कर रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने देहरादून स्थित प्रांतीय मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयानों पर पलटवार किया।
भट्ट ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवालों को कोरा झूठ बताया। उन्होंने कहा कि जनादेश खो चुकी कांग्रेस जनता का भरोसा दोबारा जीतने में असमर्थ है, इसलिए पूरे लोकतांत्रिक तंत्र को ही कठघरे में खड़ा करने पर आमादा है।
कानूनी प्रावधानों के तहत हुआ निर्णय, सुप्रीम कोर्ट से भी वैध

महेंद्र भट्ट ने निर्वाचन आयोग की आंतरिक प्रक्रियाओं पर सफाई देते हुए कानूनी पहलुओं को रेखांकित किया। उनके मुताबिक विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर किया गया प्रत्येक फैसला मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण सहमति से हुआ है।
इसमें किसी मनमानी अथवा प्रशासनिक पक्षपात की कोई गुंजाइश नहीं बचती। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) की धारा 21(3) निर्वाचन आयोग को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का स्पष्ट वैधानिक अधिकार प्रदान करती है। देश की शीर्ष अदालत भी आयोग के इस संवैधानिक अधिकार और कार्यप्रणाली को पूरी तरह विधि सम्मत करार दे चुकी है।
जीत पर चुप्पी, हारते ही संस्थाओं पर सवाल: कांग्रेस का दोहरा मानदंड
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए उसे अवसरवादी राजनीति करार दिया। भट्ट ने पूछा कि जब केरल, तमिलनाडु या फिर बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में गैर-भाजपा दल जीतते हैं, तब कांग्रेस को चुनाव मशीनरी या एसआईआर में कोई खोट क्यों नजर नहीं आती?
हकीकत यह है कि जहां जनता कांग्रेस के उम्मीदवारों को नकार देती है, वहां पार्टी आत्ममंथन करने के बजाय प्रशासनिक व संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ने लगती है। देहरादून में भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान की मौजूदगी में भट्ट ने कहा कि राहुल गांधी को देश की गरिमा गिराने वाले ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों के लिए देश की जनता से अविलंब सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।








