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यौन उत्पीड़न मामले में Brij Bhushan Sharan Singh बाइज्जत बरी, बोले- आरोप सही निकलता तो फांसी पर लटक जाता

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Rohit Arora Updated Mon, 03 Aug 2026 03:29 PM IST

भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को दिल्ली की अदालत ने यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया है। फैसले के बाद बृजभूषण ने कहा कि उन्होंने पहले दिन ही कहा था कि आरोप साबित होने पर वे खुद फांसी पर लटक जाएंगे।

Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted In Sexual Harassment Case

मुख्य बातें

  • बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामले में बरी हुए
  • दिल्ली राउज एवेन्यू कोर्ट के ACJM ने दिया फैसला
  • पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी बरी किया गया
  • दो साल पुराना हाई-प्रोफाइल मामला पूरी तरह बंद हुआ

नई दिल्ली, 03 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।

महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के बहुचर्चित आरोपों में दिल्ली की अदालत ने पूर्व डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) को बड़ी राहत दी है। अदालत से बाइज्जत बरी होने के तुरंत बाद बृजभूषण शरण सिंह का पहला बयान सामने आया। फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने साफ कहा कि उनका रुख पहले दिन से बिल्कुल स्पष्ट था और सारे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद थे।

बृजभूषण सिंह ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि उन्होंने आंदोलन शुरू होने के वक्त ही सार्वजनिक तौर पर यह बात कही थी। अगर उनके खिलाफ एक भी आरोप अदालत में साबित हो जाता, तो वे किसी सजा का इंतजार किए बिना खुद फांसी पर लटक जाते।

फैसले के बाद कोर्ट परिसर के बाहर बृजभूषण सिंह ने कहा कि माननीय जज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी किया जाता है। मेरी कही हुई बात आज अदालत के आदेश से पूरी तरह सच साबित हुई है।

उन्होंने आगे कहा कि अदालत के इस फैसले से देशभर में मौजूद उनके समर्थकों के बीच भारी खुशी का माहौल है। सामने वाले पक्ष की नीयत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वे शुरू से अपनी बेगुनाही को लेकर आश्वस्त थे और आज का दिन उनके लिए बेहद राहत और खुशी भरा है।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार की अदालत ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह के साथ भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सभी धाराओं से मुक्त कर दिया।

अदालत के इस फैसले के साथ ही पिछले दो सालों से चल रहा यह हाई-प्रोफाइल कानूनी विवाद अब पूरी तरह खत्म हो गया है। इससे पहले कोर्ट ने 2 जुलाई को दोनों पक्षों की विस्तृत लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश दिया था और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब छह महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद पर रहने के दौरान गंभीर आरोप लगाए थे। एथलीटों ने आरोप लगाया था कि कई सालों तक खेल दौरों और शिविरों के दौरान उनके साथ गलत तरीके से छूने और यौन उत्पीड़न की घटनाएं हुईं।

इन आरोपों के सामने आने के बाद साल 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के शीर्ष पहलवानों ने महीनों तक बड़ा धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी पहलवान बृजभूषण शरण सिंह की तुरंत गिरफ्तारी और उन्हें कुश्ती महासंघ से बाहर करने की मांग पर अड़े हुए थे।

मामले के राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ने के बाद कैसरगंज से तत्कालीन भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटना पड़ा था। खेल प्रशासन में पारदर्शिता लाने के दबाव के बीच उनके करीबी विनोद तोमर को भी सहायक सचिव पद से निलंबित कर दिया गया था।

शुरुआत में केंद्रीय खेल मंत्रालय की ओर से पहलवानों के दावों की जांच के लिए एक निगरानी समिति का गठन किया गया था। समिति के गठन के आश्वासन के बाद पहलवानों ने अपना धरना कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था।

जांच प्रक्रिया की धीमी गति और ठोस कार्रवाई न होने का दावा करते हुए एथलीटों ने अप्रैल 2023 में दोबारा जंतर-मंतर पर सड़क पर उतरकर आंदोलन शुरू कर दिया था। इसके बाद मामला अदालत की चौखट तक पहुंचा था।

अदालत में पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला), धारा 354A (यौन उत्पीड़न) और धारा 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप तय किए थे।

मामले में दूसरे सह-आरोपी विनोद तोमर पर भी पहलवानों को डराने-धमकाने और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं लगाई गई थीं। अदालत ने लंबी सुनवाई और पेश किए गए साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद दोनों आरोपियों को निर्दोष पाया और केस से बरी कर दिया।

Rohit Arora

रोहित अरोड़ा 'दून हॉराइज़न' की नेशनल टीम के एक अहम और अनुभवी सदस्य हैं। देश के विभिन्न राज्यों की राजनीतिक हलचल, सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसलों और सामाजिक मुद्दों पर उनकी पैनी नज़र रहती है। रोहित का फोकस हमेशा उन जमीनी खबरों पर होता है जिनका सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता है। वे अपनी रिपोर्टिंग में तटस्थता (Objectivity) और प्रामाणिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। भ्रामक सूचनाओं के इस दौर में, रोहित की तथ्यपरक और संतुलित लेखनी पाठकों के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद सेतु का काम करती है।

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