नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (आरएनएस)। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने रट्टा मार पढ़ाई को खत्म कर एनालिटिकल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए 10वीं कक्षा के परीक्षा ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है।
बोर्ड द्वारा जारी नए करिकुलम के मुताबिक, आगामी 2026-27 सत्र से गणित और विज्ञान के विषयों में ‘टू-लेवल’ असेसमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा। यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत छात्रों की तार्किक क्षमता को परखने के उद्देश्य से लिया गया है।
नई दिल्ली: सीबीएसई के इस नए फ्रेमवर्क के तहत अब 10वीं के सभी छात्र एक ही कॉमन सिलेबस के आधार पर स्टैंडर्ड मैथ और साइंस की पढ़ाई करेंगे। मुख्य परीक्षा 80 अंकों की होगी, जिसके लिए 3 घंटे का समय निर्धारित है। हालांकि, जो छात्र इन विषयों में विशेषज्ञता चाहते हैं, उनके लिए 25 अंकों का एक अलग ‘एडवांस्ड पेपर’ पेश किया गया है। 1 घंटे की अवधि वाला यह पेपर पूरी तरह वैकल्पिक होगा, जिसमें उच्च स्तरीय सवाल पूछे जाएंगे।

बोर्ड ने साफ किया है कि एडवांस्ड परीक्षा में 50 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले छात्रों को विशेष सम्मान मिलेगा। उनकी मार्कशीट पर एक ‘स्पेशल नोट’ दर्ज होगा जो भविष्य में उच्च शिक्षा और करियर में उनकी विशेषज्ञता का प्रमाण बनेगा। राहत की बात यह है कि इन 25 अंकों को मुख्य एग्रीगेट स्कोर (ओवरऑल परसेंटेज) में नहीं जोड़ा जाएगा। यदि कोई छात्र इस परीक्षा में पास नहीं हो पाता, तो भी उसकी मार्कशीट पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और न ही फेल का ठप्पा लगेगा।
सीबीएसई ने स्पष्ट कर दिया है कि साल 2026-27 से वर्तमान में चल रहे ‘मैथमेटिक्स बेसिक’ और ‘मैथमेटिक्स स्टैंडर्ड’ के विकल्प को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा। मौजूदा सत्र के छात्र पुराने ढर्रे पर ही परीक्षा देंगे, लेकिन नए सत्र से सभी के लिए बेस पेपर एक समान होगा। इसके अलावा कक्षा 10 के 20 अंकों वाले इंटरनल असेसमेंट की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है, वह पहले की तरह ही जारी रहेगी।
छात्रों को बड़ी राहत देते हुए बोर्ड ने ‘सब्जेक्ट रिप्लेसमेंट’ का नियम भी कड़ा कर दिया है। यदि कोई छात्र गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान जैसे तीन अनिवार्य विषयों में से किसी एक में फेल हो जाता है, लेकिन वह छठे या सातवें वैकल्पिक विषय (जैसे स्किल सब्जेक्ट्स) में पास है, तो फेल वाले विषय को उस वैकल्पिक विषय से रिप्लेस कर दिया जाएगा। इससे छात्रों का पूरा साल खराब होने से बचेगा और उनका फाइनल रिजल्ट ‘पास’ घोषित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव वैश्विक मानकों जैसे आईबी (IB) या कैम्ब्रिज बोर्ड की तर्ज पर किया गया है। इससे उन छात्रों को फायदा होगा जो इंजीनियरिंग या मेडिकल के लिए अपनी नींव अभी से मजबूत करना चाहते हैं, जबकि औसत छात्रों पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ेगा। बोर्ड का यह कदम कोचिंग कल्चर को कम करने और स्कूली स्तर पर ही विषय की गहराई समझने की दिशा में बड़ा प्रहार माना जा रहा है।









