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सीएम पुष्कर धामी का कड़ा निर्देश, युवाओं और महिलाओं को मिले स्वरोजगार

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Mon, 21 Sep 2026 03:09 PM IST

उत्तराखंड के गांवों को सशक्त बनाने और पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए सीएम धामी ने एम-पैक्स को मजबूत करने पर जोर दिया। पंतनगर में सहकारिता नेतृत्व प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ हुआ।

Uttarakhand Cooperative Societies

मुख्य बातें

  • पंतनगर विश्वविद्यालय में द्वितीय सहकारिता नेतृत्व प्रशिक्षण वर्ग का हुआ औपचारिक शुभारंभ।
  • प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को बहुउद्देश्यीय एम-पैक्स में बदलने पर विशेष जोर।
  • सहकार ग्रंथ विमोचन और देवभूमि सारथी राज्य सहकारी संघ की नई पहल।
  • युवाओं को कोऑपरेटिव नेटवर्क से जोड़ने के लिए चलेगा सोशल मीडिया अभियान।
  • पर्वतीय इलाकों में पलायन रोकने का मुख्य आधार बनेगी ग्रामीण सहकारिता।

दून हॉराइज़न, देहरादून (21 सितंबर) : उत्तराखंड के गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और पर्वतीय क्षेत्रों में खाली होते गांवों की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने अब सहकारी संस्थाओं को अपनी मुख्य ढाल बना लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अपने शासकीय आवास से वर्चुअल रूप से पंतनगर स्थित गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित ‘श्री लक्ष्मणराव इनामदार द्वितीय सहकारिता नेतृत्व प्रशिक्षण वर्ग’ का उद्घाटन किया।

सहकार भारती द्वारा आयोजित इस सत्र में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक हमारी प्राथमिक सहकारी समितियां सक्षम नहीं होंगी, तब तक गांवों की तस्वीर नहीं बदल सकती।

पहाड़ों में खेती की घटती जोत और युवाओं के शहरों की तरफ रुख करने की विवशता किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में पारंपारिक पैक्स (PACS) को बहुउद्देश्यीय यानी एम-पैक्स (M-PACS) में बदलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को री-इंजीनियर करने का खाका खींचा गया है।

पंतनगर से पांच बड़ी पहलों की शुरुआत

गोविन्द बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय की धरती से इस बार सहकारिता को केवल भाषणों तक सीमित न रखकर शैक्षणिक और डिजिटल धरातल पर उतारा गया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान सीएम ने ‘सहकार ग्रंथ’ का विधिवत लोकार्पण किया और ‘देवभूमि सारथी राज्य सहकारी संघ’ की रूपरेखा सामने रखी। सहकारिता को आधुनिक पीढ़ी के अनुकूल बनाने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर नए वोकेशनल और तकनीकी पाठ्यक्रमों की घोषणा की गई।

डिजिटल युग को ध्यान में रखते हुए युवाओं को जोड़ने के लिए एक विशेष सोशल मीडिया रील्स कैंपेन भी शुरू किया गया है। इसका सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नई पीढ़ी कोऑपरेटिव ढांचे को महज कागजी फाइलों या कर्ज बांटने वाली पुरानी संस्था के रूप में न देखे।

समितियों के दायरे से बाहर निकलकर जनभागीदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार सहकारिता को केवल बंद दफ्तरों और समितियों के सीमित दायरे से बाहर निकालकर सीधे जनभागीदारी और आजीविका से जोड़ना चाहती है। दरअसल, राज्य में प्राथमिक समितियों का कंप्यूटरीकरण और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के तौर पर उनका विस्तार इसी रणनीति का हिस्सा है।

पर्वतीय जिलों में जैविक उत्पादों की पैकेजिंग, स्थानीय मंडियों तक पहुंच और कोल्ड चेन नेटवर्क खड़ा करने में एम-पैक्स सीधे तौर पर मददगार साबित होंगे। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और स्थानीय काश्तकारों को जब गांव में ही वित्तीय व लॉजिस्टिक सहारा मिलेगा, तो रोजगार की तलाश में होने वाला विस्थापन अपने-आप थमेगा।

कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेन्द्र कुमार कश्यप सहित सहकार भारती के राष्ट्रीय महासचिव दीपक चौरसिया और प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार गौड़ भी जुड़े रहे। सीएम ने प्रतिनिधियों से दो-टूक कहा कि नेतृत्व प्रशिक्षण केवल औपचारिक सत्र न बने, बल्कि जमीन पर जाकर हर न्याय पंचायत स्तर तक इसका व्यावहारिक असर दिखना चाहिए।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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