नई दिल्ली। बहरहाल, दिल्ली के पॉश इलाके में चल रहे अंतरराष्ट्रीय AI समिट में जो हुआ, उसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर (ACP) देवेश कुमार महला ने साफ किया कि यह कोई अचानक हुआ विरोध नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश थी।
प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरे को भेदने के लिए तकनीक और चालाकी का ऐसा कॉकटेल बनाया कि गेट पर तैनात जवान गच्चा खा गए। सूत्रों के मुताबिक, इन लोगों ने बकायदा होमवर्क किया था ताकि मुख्य परिसर के भीतर तक पहुंच सकें।
तकनीक का इस्तेमाल और जाली एंट्री
पुलिस जांच में सामने आया कि प्रदर्शनकारियों ने एंट्री पाने के लिए तकनीक का सहारा लिया। इन्होंने या तो पहले से रजिस्ट्रेशन करा रखा था या फिर सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर फर्जी QR कोड जनरेट किए। इसी कोड की मदद से वे सिक्योरिटी स्क्रीनिंग को पार कर सीधे मुख्य हॉल के पास जा पहुंचे। दिल्ली पुलिस अब उन तकनीकी रास्तों की पड़ताल कर रही है, जिनके जरिए इन डिजिटल पासों को क्लोन किया गया या हासिल किया गया।
जैकेट के नीचे छिपे थे इरादे
हैरानी की बात यह है कि बाहर से ये लोग सामान्य विजिटर्स की तरह दिख रहे थे। चेकिंग के दौरान किसी को शक न हो, इसके लिए इन्होंने विरोध के संदेश वाली टी-शर्ट्स को अपने स्वेटर और जैकेट के नीचे छिपा रखा था। जैसे ही ये लोग हॉल के करीब पहुंचे, इन्होंने अपने ऊपरी कपड़े उतार फेंके और नारेबाजी शुरू कर दी। इस ड्रामे से अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के बीच भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिससे भारत की ‘ग्लोबल टेक हब’ वाली छवि पर भी सवाल उठे।

4 गिरफ्तार, ‘इनसाइडर’ की तलाश
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने एक्शन लेते हुए 4 मुख्य आयोजकों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके खिलाफ तिलक मार्ग थाने में सुरक्षा उल्लंघन (Security Breach) और अंतरराष्ट्रीय आयोजन में खलल डालने की गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना किसी अंदरूनी मदद के यह संभव था? ACP महला ने संकेत दिए हैं कि पुलिस इस एंगल पर भी काम कर रही है कि क्या किसी कर्मचारी या वॉलंटियर ने इन्हें अंदर के रास्तों की जानकारी दी थी।









