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Dharmendra Pradhan Resignation : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, लेकिन पिक्चर अभी बाकी है

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sat, 25 Jul 2026 03:06 PM IST

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों के एक महीने लंबे जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद शनिवार को पद छोड़ दिया। कॉकरोच जनता पार्टी ने इसे अपनी जीत बताते हुए पीड़ित परिवारों के लिए एक करोड़ मुआवजे और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग रखी है।

Dharmendra Pradhan Resignation : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, लेकिन पिक्चर अभी बाकी है

मुख्य बातें

  • धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया।
  • सीजेपी ने जंतर-मंतर पर जीत का जश्न मनाया।
  • मृतक छात्रों के परिवारों को एक करोड़ मुआवजा मांगा।
  • अभिजीत दिपके ने पुलिस अफसरों पर कार्रवाई मांगी।

नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

Dharmendra Pradhan Resignation : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय से डेरा डाले बैठे छात्र और युवा लगातार उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे थे। प्रधान ने अपना त्यागपत्र सौंपते हुए साफ कहा कि उन्हें प्रजातंत्र पर पूरा भरोसा है।

शुक्रवार को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनकारियों से दिल्ली में बातचीत की थी। इस बैठक में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधि भी पूरी तैयारी के साथ शामिल हुए थे। सीजेपी नेताओं ने सरकार के सामने एक ही शर्त रखी थी कि शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने तक सड़क का आंदोलन वापस नहीं होगा।

शनिवार को इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर का माहौल पूरी तरह बदल गया। कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों और छात्रों ने भारी भीड़ के बीच नारेबाजी शुरू कर दी। मंच से इसे छात्रों के लंबे संघर्ष और सड़क पर डटे रहने की सीधी सफलता घोषित किया गया।

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने समर्थकों की भारी भीड़ को संबोधित किया। उन्होंने सरकार के पीछे हटने को जनता की सीधी ताकत बताया। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोग मानते थे कि इस सरकार में मंत्री इस्तीफा नहीं देते, लेकिन हमने साबित कर दिया कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।

दिपके ने आंदोलन के मूल उद्देश्य और उसके विस्तार पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क पर उतरने का मकसद सिर्फ एक केंद्रीय मंत्री को हटाना नहीं था। परीक्षा विवाद और अनियमितताओं की वजह से जिन छात्रों का भविष्य खराब हुआ है, उन्हें अंतिम रूप से न्याय दिलाना ही इस धरने का लक्ष्य है।

पीड़ित छात्रों के परिवारों के लिए लड़ाई आगे भी लड़ी जाएगी। दिपके ने अपने संबोधन में कॉकरोच जनता पार्टी के नाम का जिक्र करते हुए एक सख्त टिप्पणी की। उन्होंने भीड़ से कहा कि कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है।

परीक्षा विवाद के कारण जान गंवाने वाले छात्रों का मुद्दा मंच से फिर उठाया गया। सीजेपी की तरफ से आत्महत्या कर चुके छात्रों के परिवारों के लिए भारी आर्थिक सहायता का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार से सीधे तौर पर मांग की गई है कि हर पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा तत्काल प्रभाव से दिया जाए।

जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी टकराव हुआ था। दिपके ने पुलिस की उस कार्रवाई की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग रखी है। उन्होंने भीड़ के सामने दिल्ली पुलिस के कुछ चुनिंदा अधिकारियों के नाम लिए।

डीसीपी संदीप लांबा, एसीपी अजय शर्मा और सचिन शर्मा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए। सीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए इन्हीं अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। मंच से आवाज उठी कि यदि मंत्री पद छोड़ सकता है तो पुलिस अधिकारियों पर भी प्रशासनिक गाज गिरनी चाहिए।

सीजेपी ने अभी जंतर-मंतर खाली करने से साफ इनकार कर दिया है। नेताओं ने ऐलान किया है कि उनकी बाकी मांगें पूरी होने तक टेंट और तंबू यहीं लगे रहेंगे। जब तक पुलिस अफसरों पर जांच नहीं बैठती और मुआवजे का आदेश जारी नहीं होता, विरोध प्रदर्शन अपने मौजूदा स्वरूप में चलता रहेगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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