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क्या पूरी तरह सुरक्षित हैं जिले की वोटिंग मशीनें? प्रशासन ने राजनीतिक दलों को कराया मुआयना

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sat, 05 Sep 2026 06:14 PM IST

देहरादून के जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ ईवीएम वेयरहाउस का औचक मुआयना किया और सुरक्षा व्यवस्था व लॉग-बुक का जायजा लिया।

dehradun evm warehouse inspection

मुख्य बातें

  • डीएम डॉ. आशीष चौहान ने राजनीतिक दलों के साथ वेयरहाउस का निरीक्षण किया।
  • भारत निर्वाचन आयोग के सुरक्षा प्रोटोकॉल को शत-प्रतिशत लागू करने का सख्त निर्देश।
  • राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों में आप और बीजेपी के पदाधिकारी मुख्य रूप से रहे उपस्थित।
  • एंट्री-एग्जिट रजिस्टर और मशीनों के तकनीकी रख-रखाव की बारीकी से पड़ताल की गई।

दून हॉराइज़न, देहरादून (05 सितंबर): जिले में चुनावी विश्वसनीयता और प्रशासनिक सतर्कता को परखने के लिए शनिवार को जिला प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया। जिला निर्वाचन अधिकारी और डीएम डॉ. आशीष चौहान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को साथ लेकर सीधे ईवीएम वेयरहाउस पहुंचे।

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मकसद साफ था—ईवीएम (Electronic Voting Machine) और वीवीपैट (VVPAT) मशीनों की सुरक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर पारदर्शी बनाए रखना। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोटिंग मशीनों की हिफाजत केवल कमरों में ताला जड़ने भर तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया काम करती है।

सुरक्षा का कड़ा पहरा और डबल लॉक सिस्टम की जांच

वेयरहाउस के भीतर पहुंचते ही जिलाधिकारी ने सुरक्षा घेरे, तैनात पहरेदारों के रोस्टर और चौबीसों घंटे चलने वाले सीसीटीवी कैमरों की स्थिति का जायजा लिया। दरअसल, केंद्रीय निर्वाचन आयोग की नियमावली के मुताबिक वेयरहाउस केवल अधिकृत अधिकारियों और मान्यता प्राप्त दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही खोला जा सकता है।

डीएम ने वहां रखे सुरक्षा लॉग-बुक, आगंतुक पंजिका और इन-आउट टाइमिंग के रिकॉर्ड को खुद पलटकर देखा। मौके पर मौजूद अधिकारियों को हिदायत दी गई कि किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति की आवाजाही परिसर के आसपास कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जरा सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।

पारदर्शिता पर जोर, राजनीतिक प्रतिनिधियों को दी गई पूरी जानकारी

प्रशासनिक टीम ने निरीक्षण के दौरान बीजेपी नेता दौलतराम मकवाना और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि कमल राणा सहित अन्य नेताओं को सुरक्षा लेयर्स के बारे में विस्तार से समझाया। वेयरहाउस की सीलिंग, सुरक्षा कक्षों की नमी रहित स्थिति और मशीनों को धूल-धक्कड़ से बचाने के इंतजामों पर चर्चा हुई।

डॉ. चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि चुनावी प्रक्रिया की साख जनता के भरोसे पर टिकी होती है। अगर मशीनों के रख-रखाव में तय एसओपी का पालन नहीं होगा, तो निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसलिए समय-समय पर ऐसे संयुक्त निरीक्षण अनिवार्य रूप से जारी रहेंगे।

प्रशासनिक अमला रहा मुस्तैद

इस संयुक्त मुआयने के दौरान मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव शाह, ईवीएम के नोडल अधिकारी दिनक रौतेला, तहसीलदार सदर सुरेंद्र देव तथा सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र देवली भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने वेयरहाउस परिसर में अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन बिजली बैकअप और आपात निकास द्वारों की तकनीकी स्थिति की भी समीक्षा की।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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