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पूर्वोत्तर में जेएमबी का आतंकी नेटवर्क बेनकाब, एनआईए ने 3 राज्यों में 13 संदिग्ध दबोचे

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Robin Verma Updated Thu, 01 Oct 2026 05:37 PM IST

असम और बंगाल में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की साजिश का एनआईए ने पर्दाफाश किया। टेलीग्राम ग्रुप 'पूर्व आकाश' के जरिए जेएमबी के बांग्लादेशी हैंडलर नेटवर्क फैला रहे थे। 13 संदिग्ध गिरफ्तार।

NIA Raid JMB Terror Module

मुख्य बातें

  • एनआईए ने असम, बंगाल और केरल में छापे मारकर 13 संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
  • युवाओं के ब्रेनवॉश के लिए टेलीग्राम पर 'पूर्व आकाश' नाम से सीक्रेट ग्रुप बनाया।
  • प्रतिबंधित जमात-उल-मुजाहिदीन (JMB) ने नेटवर्क विस्तार के लिए 'इमाम महमूदेर काफिला' संगठन खड़ा किया।
  • असम से अकेले आठ संदिग्ध दबोचे गए, पूर्वोत्तर में डेढ़ साल से सीक्रेट बैठकें चल रही थीं।
  • बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद छूटे कैडर भारत में सक्रिय होने की ताक में थे।

दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (1 अक्टूबर) : राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (National Investigation Agency) ने पूर्वोत्तर और सीमावर्ती राज्यों में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की एक गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश किया है। बांग्लादेश में बैठे कट्टरपंथी हैंडलर एनक्रिप्टेड टेलीग्राम चैनल ‘पूर्व आकाश’ (Eastern Sky) की आड़ में असम और पश्चिम बंगाल के नौजवानों को बरगला रहे थे। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ते हुए असम, पश्चिम बंगाल और केरल के 16 ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाकर 13 आरोपियों को हिरासत में लिया।

पकड़े गए संदिग्धों में से अकेले आठ असम के रहने वाले हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, प्रतिबंधित संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) ने भारत के भीतर अपनी जड़ें जमाने के लिए ‘इमाम महमूदेर काफिला’ यानी आईएमके (IMK) नामक एक नया विंग तैयार किया था।

धार्मिक सभाओं की आड़ में गुपचुप बैठकें

जांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार, जेएमबी के सीनियर सदस्य इमाम महमूद हबीबुल्लाह ने आईएमके की नींव रखी थी। यह गिरोह पिछले लगभग 18 महीनों से असम और पूर्वोत्तर के दूरदराज इलाकों में गुप्त बैठकें आयोजित कर रहा था। गांव-देहात में होने वाले सामान्य धार्मिक जलसों और तकरीरों की आड़ में संदिग्ध युवाओं की पहचान की जाती थी। इसके बाद उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर धकेला जाता था।

सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी साहित्य, ऑडियो संदेश और तकरीरें साझा कर युवाओं की सोच को चरमपंथ की तरफ मोड़ा जा रहा था। और यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों ने इनके डिजिटल ट्रेल को खंगालना शुरू किया, जिससे ‘पूर्व आकाश’ चैनल का राज खुला।

ढाका की जेलों से छूटे आतंकियों का नेटवर्क

जांच में सामने आया कि इस पूरे खेल के तार अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) से भी सीधे जुड़े हैं। पिछले साल अगस्त में बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बेदखल होने के बाद वहां की जेलों में बंद कई दुर्दांत चरमपंथी या तो रिहा हो गए या फिर जेल तोड़कर फरार होने में कामयाब रहे। इन रिहा हुए कैडरों ने भारत में पहले से निष्क्रिय पड़े स्लीपर सेलों को फिर से जीवित करने के निर्देश जारी किए थे।

पूर्वोत्तर का चिकन्स नेक कॉरिडोर और असम-बंगाल की पोरस सीमाएं लंबे समय से घुसपैठियों के निशाने पर रही हैं। लिहाजा, इसी भौगोलिक कमजोरी का फायदा उठाकर सीमा पार से फंड और प्रोपेगैंडा सामग्री भेजी जा रही थी।

असम पुलिस के रडार पर था मॉड्यूल

यह कोई अचानक हुई कार्रवाई नहीं है। राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच महीनों से तालमेल चल रहा था। इसी नेटवर्क से जुड़े 11 संदिग्धों को असम पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने दिसंबर 2025 में गोलपारा और बारपेटा बेल्ट के आसपास से दबोचा था। उन गिरफ्तारियों के बाद बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक पड़ताल ने एनआईए को इस बड़े इंटर-स्टेट नेटवर्क तक पहुंचाया। केरल में हुई गिरफ्तारी इस बात की तस्दीक करती है कि गिरोह ने प्रवासी मजदूरों के जरिए दक्षिण भारत तक संपर्क साधने की कोशिश की थी। मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (UAPA) के तहत जांच जारी है।

Robin Verma

रॉबिन वर्मा 'दून हॉराइज़न' न्यूज़ नेटवर्क के एक अनुभवी और तेज-तर्रार पत्रकार हैं, जो विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को कवर करते हैं। डिजिटल जर्नलिज्म के इस दौर में रॉबिन की ग्राउंड रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों को आसान भाषा में समझाने की कला उन्हें एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। दिल्ली की राजनीतिक गलियारों की हलचल हो, क्राइम की खबरें हों, या आम जनता से जुड़े स्थानीय मुद्दे—रॉबिन यह सुनिश्चित करते हैं कि हर जरूरी खबर सबसे पहले और बिना किसी मिलावट के 'दून होराइजन' के पाठकों तक पहुंचे। तथ्यों की गहराई में जाकर बेबाक और निष्पक्ष पत्रकारिता करना ही इनकी पहचान है।

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