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मणिपुर में नागा संगठन का बड़ा अल्टीमेटम, सुरक्षा न मिलने पर चीन से मांगेंगे मदद

मणिपुर में नागा नागरिकों की सिलसिलेवार हत्याओं के बीच तांगखुल संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार को सीधी चेतावनी दी है। सुरक्षा न मिलने पर चीन से गुहार लगाने की बात कही गई है।

Naga Group Warn Centre Govt

HIGHLIGHTS

  • तांगखुल अजे कटनाओ लोंग ने भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा मांगी।
  • सरकार विफल रही तो चीन से मदद लेने की चेतावनी दी।
  • संगठन ने मणिपुर के मुख्यमंत्री से पद छोड़ने की मांग उठाई।
  • फरवरी से नागा-कुकी-जो संघर्ष में अब तक 50 मौतें दर्ज।
  • हाल ही में पिलोंग समेत तीन जिलों में हुई थी हत्याएं।

दून हॉराइज़न, इम्फाल (1 अक्टूबर) : पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में जारी जातीय तनाव के बीच अब नागा समुदायों में अपनी सुरक्षा को लेकर गहरा रोष उभर आया है। राजधानी इम्फाल में तांगखुल अजे कटनाओ लोंग (Tangkhul Katanao Long) यानी सदर्न तांगखुल स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष यारचुइसो काशुंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों में आदिवासियों की हिफाजत नहीं कर सकतीं, तो स्थानीय लोगों को चीन जैसे पड़ोसी मुल्कों से मदद मांगने पर मजबूर होना पड़ेगा।

सीमावर्ती गांवों में उपेक्षा और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग

छात्र नेता काशुंग के मुताबिक भारत-म्यांमार सीमा से सटे पहाड़ी जिलों में रहने वाली आबादी खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रही है। उनका कहना था कि जब शासन और प्रशासन दोनों ही लोगों की जान-माल की रक्षा करने में नाकाम रहते हैं, तो सीमाई नागरिकों के भीतर अलगाव की भावना घर करने लगती है।

काशुंग ने कहा कि इस विफलता के बाद लोगों को लगने लगता है कि वे न तो राज्य का हिस्सा हैं और न ही मुख्यधारा के देश का। संगठन ने दो-टूक कहा कि अगर मौजूदा मुख्यमंत्री राज्य और नागरिकों को सुरक्षा कवच देने में असमर्थ हैं, तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें स्वेच्छा से इस्तीफा दे देना चाहिए।

हालिया हत्याओं से दहले तीन पर्वतीय जिले

नागा संगठन ने खासतौर पर कामजोंग, तमेंगलोंग और सेनापति जिलों में हुई हिंसक वारदातों का हवाला देकर जवाबदेही तय करने की आवाज उठाई। बीते दिनों कामजोंग के पिलोंग इलाके में चार तांगखुल नागा नागरिकों की जान ले ली गई थी।

इसके अलावा सेनापति और तमेंगलोंग में एक 17 वर्षीय लियांगमेई नागा किशोर और तीन माओ नागा नागरिकों की निर्मम हत्याओं ने पूरे इलाके में आक्रोश भड़का दिया है। संगठन का आरोप है कि संवेदनशील इलाकों में गश्त और अग्रिम चौकियों की कमी के चलते असामाजिक तत्व खुलेआम वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

नागा-कुकी-जो टकराव का नया मोर्चा

यह तीखा बयान ऐसे वक्त में आया है जब फरवरी से शुरू हुआ नागा-कुकी-जो संघर्ष विकराल रूप ले चुका है। दोनों गुटों के बीच जारी इस खूनी खींचतान में अब तक करीब 50 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

आंकड़ों की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल बीते एक महीने में ही 22 लोगों की मौत दर्ज की गई, जिसमें दोनों पक्षों के 11-11 नागरिक शामिल हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इन संवेदनशील इलाकों में फौरन केंद्रीय बलों की अतिरिक्त तैनाती और स्थानीय समुदायों के बीच संवाद स्थापित नहीं किया गया, तो सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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