दून हॉराइज़न, चंडीगढ़ (1 अक्टूबर) : कारखानों में आग लगने या भारी उपकरण ठप होने पर अब छोटे उद्योगपतियों की पूंजी नहीं डूबेगी। राज्य के सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को अप्रत्याशित वित्तीय जोखिम से उबारने के मकसद से हरियाणा सरकार ने एक व्यावहारिक कदम उठाया है। नई लागू की गई हरियाणा प्रोग्रेसिव MSME एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2026 (Haryana Progressive MSME and Export Promotion Policy) के तहत प्रदेश में स्थापित विनिर्माण इकाइयों को उनके संयंत्र और मशीनरी के इंश्योरेंस प्रीमियम पर सीधी वित्तीय छूट दी जाएगी।
3 साल में 15 लाख तक का सुरक्षा कवच
विनिर्माण इकाइयों के लिए वर्कशॉप में रखी भारी मशीनें ही उनकी असली कमाई का जरिया होती हैं। अक्सर प्रीमियम का भारी खर्च देखकर छोटे उद्यमी इनका बीमा कराने से कतराते हैं। अब नई व्यवस्था में सरकार कुल प्रीमियम का 33 फीसदी हिस्सा खुद वहन करेगी। एक वित्तीय वर्ष में यह रकम अधिकतम पांच लाख रुपये तक हो सकेगी।

अगर कोई पात्र इकाई लगातार तीन वर्षों तक अपनी मशीनों का नवीनीकरण और बीमा कराती है, तो वह कुल 15 लाख रुपये तक की सरकारी सहायता की हकदार होगी। इसका सीधा असर फरीदाबाद, पानीपत, सोनीपत और गुरुग्राम के ऑटो कंपोनेंट, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग क्लस्टरों से जुड़े हजारों छोटे कारखानों पर पड़ेगा।
पोर्टल पर आवेदन और 7 दिनों में 50% अग्रिम
उद्योगपतियों को इस योजना का लाभ लेने के लिए किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं होगी। पूरा प्रोसेस सिंगल विंडो सिस्टम यानी ‘इनवेस्ट हरियाणा’ (Invest Haryana Portal) के जरिए ऑनलाइन निपटाया जाएगा।

प्रक्रिया बेहद साफ है:
- उद्यमी को सबसे पहले किसी भी आईआरडीएआई (IRDAI) पंजीकृत सामान्य बीमा कंपनी से अपनी मशीनरी और प्लांट का स्टैंडर्ड फायर व स्पेशल पेरिल्स या मशीनरी ब्रेकडाउन इंश्योरेंस लेना होगा।
- पूरा प्रीमियम चुकाने के बाद रसीद और पॉलिसी कॉपी पोर्टल पर क्लेम फॉर्म के साथ अपलोड करनी होगी।
- जिला उद्योग केंद्र (DIC) स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन के ठीक सात कार्यदिवसों के भीतर स्वीकृत प्रोत्साहन राशि का 50 फीसदी एडवांस उद्यमी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। शेष राशि का समायोजन अंतिम ऑडिट के बाद पूरा होगा।
पात्रता और जरूरी कागजात
यह रियायत केवल हरियाणा की भौगोलिक सीमा के भीतर कार्यरत वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों (Manufacturing Units) के लिए है; शुद्ध व्यापारिक या सेवा क्षेत्र से जुड़ी फर्में इसके दायरे में नहीं आएंगी। प्लांट एवं मशीनरी में निवेश के केंद्र सरकार के तय मानकों (माइक्रो के लिए ₹1 करोड़ और स्मॉल के लिए ₹10 करोड़ तक) पर खरा उतरना अनिवार्य होगा।
आवेदन करते समय फर्म का ‘उद्यम पंजीकरण प्रमाणपत्र’ (Udyam Registration), राज्य का ‘हरियाणा उद्यम ज्ञापन’ (HUM नंबर), जीएसटी रिटर्न, पैन, फर्म का चालू बैंक खाता, लीज डीड या फैक्ट्री ओनरशिप प्रूफ और प्रीमियम भुगतान का बैंक स्टेटमेंट साथ लगाना अनिवार्य है। उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी इकाई ने पहले से ही किसी अन्य केंद्रीय योजना के तहत इसी मद में सब्सिडी उठाई है, तो उसे दोहरा लाभ नहीं मिलेगा।








