दून हॉराइज़न, विकासनगर/देहरादून (25 सितंबर) : पछवादून की शांत वादियों और घने जंगलों के बीच बसा मटोगी गांव इन दिनों उत्तराखंड के आध्यात्मिक मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। यहां पहाड़ की चोटी पर स्थित ध्यान धारेश्वर महादेव मंदिर (Dhyan Dhareshwar Mahadev Temple) केवल पारंपरिक पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह योग, ध्यान और आत्मिक शांति के नए केंद्र के रूप में पर्यटकों व श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।
मसूरी रेंज के प्रसिद्ध भादराज मंदिर के ठीक पीछे ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से यहां से पछवादून और जौनसार-बावर की तलहटी का विहंगम दृश्य साफ नजर आता है।
पशुपतिनाथ जैसी आभा और 9 शिवलिंगों का दुर्लभ संगम

मंदिर परिसर की सबसे अनूठी पहचान यहां स्थापित भगवान भोलेनाथ की विशालकाय प्रतिमा है। स्थानीय परंपरा और मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यह स्वरूप नेपाल के काठमांडू स्थित ऐतिहासिक पशुपतिनाथ क्षेत्र की शिव प्रतिमा की बनावट और मुद्रा से प्रेरित होकर गढ़ा गया है।
इसके अतिरिक्त, प्रांगण में स्थापित नौ शिवलिंगों का समूह श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य आधार है। भक्त एक ही परिक्रमा में नव-शिवलिंगों का जलाभिषेक करते हैं।
आमतौर पर पर्वतीय अंचलों में एकल शिवलिंग वाले शिवालय मिलते हैं, लेकिन एक साथ नौ शिवलिंगों की प्राण-प्रतिष्ठा इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशिष्ट बना देती है।

ग्रामीण आस्था से लेकर आध्यात्मिक पर्यटन तक
सावन और महाशिवरात्रि पर यहां भारी मेला जुटता है। मटोगी सहित लांघा, पास्टा, पिपलसार, खुलेत और मदरसू जैसे नजदीकी गांवों के लोगों के लिए यह कुलदेवता समान पूजनीय स्थल है। देहरादून शहर से वीकेंड पर आने वाले युवाओं और ध्यान-साधकों की संख्या में भी खासा इजाफा देखा जा रहा है।
देहरादून से दर्शन करने पहुंचीं श्रद्धालु माधुरी के मुताबिक, भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर यह स्थान मेडिटेशन के लिए प्राकृतिक ऊर्जा प्रदान करता है। चीड़-बांज के घने जंगलों के बीच बहने वाली ठंडी हवाएं और घंटियों की गूंज मन को स्वतः अंतर्मुखी कर देती हैं।

कैसे पहुंचें और क्या है रूट?
सड़क मार्ग से आने वाले तीर्थयात्री देहरादून से शिमला बाईपास या चकराता रोड पकड़कर विकासनगर और हरबर्टपुर पहुंच सकते हैं। वहां से लांघा रोड होते हुए मटोगी गांव तक पक्की और घुमावदार पहाड़ी सड़क जाती है।
ट्रैकिंग के शौकीन यात्री मसूरी के क्लाउड्स एंड से होकर भादराज मंदिर के रास्ते भी इस सुरम्य घाटी की ओर रुख करते हैं। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ यह ट्रैक पछवादून के ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय होमस्टे को भी नई संजीवनी दे रहा है।








