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सीईसी के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष, ममता और खड़गे ने साधा चुनाव आयोग पर सीधा निशाना

इंडिया गठबंधन ने दिल्ली बैठक में 5 साझा महारैलियों और देशव्यापी आंदोलन का रोडमैप तय किया। बैलेट पेपर से चुनाव और सीईसी के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष ने तेवर तल्ख किए।

INDIA Bloc Joint Rallies

HIGHLIGHTS

  • अक्टूबर और नवंबर में इंडिया ब्लॉक करेगा 5 संयुक्त महारैलियां।
  • 2 से 8 अक्टूबर के बीच देशव्यापी 'लोकतंत्र बचाओ मार्च'।
  • विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग दफ्तर तक निकालेंगे मार्च।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और बैलेट पेपर वापसी की मांग।
  • वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर उठाए गंभीर सवाल।

दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (1 अक्टूबर) : राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं की अहम बैठक में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ साझा आर-पार की रणनीति पर मुहर लग गई है। आगामी विधानसभा चुनावों और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को मुद्दा बनाते हुए विपक्षी दलों ने सड़क से लेकर संसद तक एक ठोस कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया। तय कार्यक्रम के अनुसार विपक्षी दल अक्टूबर और नवंबर के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में 5 बड़ी साझा महारैलियां करेंगे, जिनमें पहली बड़ी रैली 1 नवंबर को दिल्ली में आयोजित होगी।

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, सपा, राजद, जेएमएम, डीएमके, एनसीपी और वामपंथी दलों सहित 19 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शिरकत की।

सप्ताह भर का जन-आंदोलन और आयोग का घेराव

बैठक में तय हुए साझा एक्शन प्लान के तहत महात्मा गांधी की जयंती यानी 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देशभर में जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ निकाला जाएगा। इस जमीनी अभियान के जरिए विपक्षी कार्यकर्ता आम नागरिकों के बीच जाकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बात करेंगे।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए 6 अक्टूबर को विपक्षी दलों के तमाम सांसद निर्वाचन सदन यानी चुनाव आयोग मुख्यालय तक पैदल मार्च करेंगे। विपक्ष ने इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रपति से भी मुलाकात का समय मांगने का निर्णय लिया है। ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना ही लोकतंत्र की बुनियाद है।

ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर और प्री-एसआईआर सूची की वकालत

बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दो प्रमुख चुनावी मांगों पर पूरे गठबंधन की सहमति बनाई। पहली मांग यह कि चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह पारंपरिक मतपत्र यानी बैलेट पेपर से मतदान कराया जाए। दूसरी बड़ी मांग हाल ही में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठी। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम छांटे गए हैं।

खड़गे ने जोर दिया कि आगामी चुनावों में एसआईआर से पहले की मूल मतदाता सूची लागू की जाए। यदि किसी भी नागरिक का नाम काटना हो, तो उसे पूर्व सूचना, स्पष्ट कारण और अपील का विधिवत अधिकार मिलना चाहिए ताकि प्रशासनिक चूकों के चलते कोई भी पात्र युवा या नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।

आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट बनी सियासी चिंगारी

यह पूरा राजनीतिक उबाल हाल ही में सामने आई उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें निर्वाचन आयोग के अंदरूनी मतभेद उजागर हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान एसआईआर से संबंधित कई अहम फैसलों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक आपत्ति (Dissent Note) दर्ज कराई थी। दोनों आयुक्तों का पक्ष था कि ये निर्देश उनकी सहमति या अनुशंसा के बिना जारी किए गए। हालांकि आयोग का कहना है कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और उसके सभी प्रशासनिक आदेश पूरी तरह कानून सम्मत हैं।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बैठक के बाद स्पष्ट संदेश दिया कि विपक्ष देश के संविधान और जनादेश की रक्षा के लिए पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और विपक्ष जनता की आवाज बनकर हर मंच पर यह लड़ाई लड़ेगा।

Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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