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उत्तराखंड के वीरान गांव का दर्द अब बड़े पर्दे पर, 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी ‘चिता’

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Tue, 29 Sep 2026 05:48 PM IST

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता विनोद कापड़ी की चर्चित फिल्म 'चिता' 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। कुमाऊं के बुजुर्ग दंपति और पलायन के दर्द पर बनी यह फिल्म 18 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है।

Vinod Kapri Chita Movie Release Date

मुख्य बातें

  • राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता विनोद कापड़ी की फिल्म 'चिता' 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आएगी।
  • मुख्य भूमिका निभाने वाले दोनों बुजुर्गों ने जीवन में पहली बार कैमरे का सामना किया।
  • दुनिया भर के 28 अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में यह फिल्म 18 पुरस्कार जीत चुकी है।
  • ऑस्कर विजेता माइकेल डैना का संगीत और गुलज़ार के लिखे गीत फिल्म की पहचान हैं।

दून हॉराइज़न, देहरादून (29 सितंबर) : पहाड़ों से हो रहे लगातार खालीपन और बुजुर्गों के सूने आशियानों की हकीकत बयां करती बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘चिता’ (Chita Film) आगामी 23 अक्टूबर 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्ममेकर विनोद कापड़ी के निर्देशन में बनी यह फिल्म कुमाऊं अंचल के एक सुदूर गांव में रह रहे एक उम्रदराज़ दंपति की मार्मिक प्रेम कहानी और उनकी तन्हाई को उजागर करती है।

पहाड़ों से रोजगार और बेहतर भविष्य के वास्ते शहरों की ओर रुख कर चुकी युवा पीढ़ी के पीछे छूटे गांव किस तरह ‘घोस्ट विलेज’ यानी वीरान बस्तियों में बदल रहे हैं, यह सिनेमाई रचना उसी जमीनी संकट को गहराई से छूती है।

भगीरथी फिल्म्स और मशकबीन स्टूडियोज के संयुक्त बैनर तले सुरेश जोशी, अरिंद्र राय चौधरी और खुद विनोद कापड़ी द्वारा निर्मित इस फीचर फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता इसका गैर-पेशेवर कास्टिंग चयन है। फिल्म के दोनों मुख्य किरदारों में 80 वर्षीय पूर्व सैनिक पदम सिंह कापड़ी और 70 साल की हीरा देवी नजर आएंगे। दोनों स्थानीय निवासी हैं।

उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इन्हीं बीहड़ वादियों में बिताई है। कैमरे के सामने आने का उनका यह पहला तजुर्बा था, लेकिन उनकी स्वाभाविक भाव-भंगिमाओं ने परदे पर जो संजीदगी पैदा की, वह किसी मझे हुए कलाकार के लिए भी आसान नहीं थी।

निर्देशक विनोद कापड़ी के अनुसार यह दास्तान उस गहरे प्रेम की है जो उम्र की आखिरी दहलीज पर खड़े दो इंसानों को थामे रखता है, साथ ही उन बुजुर्ग मां-बाप के अनकहे दर्द की भी जिनके बच्चे दूर महानगरों में बस चुके हैं। उन्होंने साफ किया कि इस सच्चाई को पर्दे पर जीवित रखने के लिए असल जीवन जी रहे लोगों से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता था।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस रचना ने पहले ही अपनी धाक जमाई है। एस्तोनिया में आयोजित प्रतिष्ठित 28वें टालिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल (Tallinn Black Nights Film Festival) में इसका वर्ल्ड प्रीमियर हुआ, जहां इसने दर्शकों की पहली पसंद बनकर ‘पॉफ सर्वश्रेष्ठ फिल्म ऑडियंस अवॉर्ड’ अपने नाम किया। इसके अलावा साओ पाउलो, कैंब्रिज, बाथ और केरल जैसे प्रमुख फेस्टिवल्स में सराहे जाने के साथ यह फिल्म अब तक 15 ‘सर्वश्रेष्ठ फिल्म’ ट्रॉफियों समेत कुल 18 वैश्विक खिताब हासिल कर चुकी है।

देशभर के मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघरों में इसका वाणिज्यिक वितरण मल्टीप्लेक्स चेन सिनेपोलिस (Cinépolis) द्वारा संभाला जा रहा है। ऑस्कर और गोल्डन ग्लोब विजेता कनाडाई संगीतकार माइकेल डैना का धुन-संयोजन और प्रख्यात शायर-गीतकार गुलज़ार के रचे बोल इस रचना को तकनीकी और कलात्मक रूप से विश्वस्तरीय ऊंचाई देते हैं। पूरी तरह उत्तराखंड के बीहड़ इलाकों में फिल्माई गई यह कहानी 23 अक्टूबर को दर्शकों को पहाड़ों की असलियत से रूबरू कराएगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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