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IIT Roorkee का कमाल, अब एयरोस्पेस और कारों को मिलेगी स्वदेशी थर्मल सुरक्षा

आईआईटी रुड़की ने स्वदेशी तकनीक के क्षेत्र में बड़ा धमाका करते हुए 'एरोजेल थर्मल रैप्स' टेक्नोलॉजी इंडोबेल इंसुलेशन्स लिमिटेड को ट्रांसफर कर दी है। प्रो. कौशिक पाल की यह खोज एयरोस्पेस से लेकर कंस्ट्रक्शन सेक्टर तक थर्मल इंसुलेशन की दुनिया में क्रांति लाने के लिए तैयार है।

Published On: February 24, 2026 6:27 PM
IIT Roorkee का कमाल, अब एयरोस्पेस और कारों को मिलेगी स्वदेशी थर्मल सुरक्षा

HIGHLIGHTS

  1. आईआईटी रुड़की और इंडोबेल इंसुलेशन्स लिमिटेड के बीच हुआ आधिकारिक करार।
  2. पूरी तरह स्वदेशी और हल्के वजन वाली एरोजेल-आधारित इंसुलेशन तकनीक विकसित।
  3. एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, और ऊर्जा प्रणालियों में थर्मल सुरक्षा के लिए गेम-चेंजर।
  4. प्रो. कौशिक पाल और सुश्री गुंजन शर्मा की टीम ने तैयार किया यह भविष्य का 'थर्मल शील्ड'।

रुड़की। देवभूमि के प्रतिष्ठित संस्थान IIT Roorkee ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अनुसंधान जब लैब से निकलकर जमीन पर उतरता है, तो उद्योग जगत की सूरत बदल जाती है।

संस्थान ने अपनी अत्याधुनिक ‘एरोजेल-आधारित थर्मल इंसुलेशन’ तकनीक का तकनीकी ज्ञान (Know-how) इंडोबेल इंसुलेशन्स लिमिटेड को हस्तांतरित कर दिया है। यह कदम न केवल ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल को मजबूती देता है, बल्कि उच्च-प्रदर्शन वाले हल्के इंसुलेशन समाधानों के लिए विदेशी निर्भरता को भी खत्म करने का माद्दा रखता है।

प्रो. कौशिक पाल का ‘थर्मल मास्टरस्ट्रोक’

इस नवाचार के पीछे प्रो. कौशिक पाल और सुश्री गुंजन शर्मा की कड़ी मेहनत है। यह एरोजेल तकनीक इतनी सक्षम है कि यह भीषण तापमान और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी ऊर्जा की बचत और सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

चाहे अंतरिक्ष में जाने वाले यान हों या सड़कों पर दौड़ती गाड़ियां, यह तकनीक हर जगह फिट बैठती है। प्रो. पाल ने स्पष्ट किया कि यह आविष्कार केवल एक शोध पत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा व्यावहारिक समाधान है जो उद्योगों की कार्यक्षमता में तहलका मचा देगा।

उद्योगों में मचेगी हलचल

इंडोबेल इंसुलेशन्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, श्री विजय बर्मन ने इस साझेदारी को भविष्य की जरूरत बताया है। उन्होंने कहा कि कंपनी इस तकनीक को बड़े पैमाने पर बाजार में उतारने के लिए कमर कस चुकी है।

निर्माण क्षेत्र से लेकर पर्यावरणीय समाधानों तक, एरोजेल रैप्स का इस्तेमाल उन जगहों पर होगा जहाँ पारंपरिक इंसुलेशन फेल हो जाते हैं। आईआईटी रुड़की का यह अनुसंधान-आधारित प्रहार वैश्विक बाजार में भारतीय तकनीक का पारा चढ़ा देगा।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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