देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में एलपीजी गैस सिलेंडरों की होम डिलीवरी में हो रहे बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। जिलाधिकारी सविन बंसल के कड़े रुख के बाद नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह और एसडीएम सदर हरिगिरि ने शहर की दो प्रमुख गैस एजेंसियों पर औचक छापेमारी की।
जांच के दौरान उपभोक्ताओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि डिलीवरी मैन फोन पर ओटीपी मांग लेते हैं और सिलेंडर पहुंचाए बिना ही उनके खातों में डिलीवरी ‘सक्सेसफुल’ दिखा दी जाती है।
अमरदीप गैस एजेंसी के निरीक्षण में बड़ोवाला निवासी अरुण खरबंदा और आशुतोषनगर के जितेंद्र अरोड़ा ने अधिकारियों को बताया कि ओटीपी देने के बाद उन्हें मैसेज तो मिल गया, लेकिन सिलेंडर नहीं पहुंचा। खुड़बुड़ा के पंकज ठाकुर और सेलाकुई के रविंद्र ने भी इसी तरह की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। रविंद्र ने बताया कि 3 मार्च को कागजों में डिलीवरी दिखाने के बाद अब दोबारा बुकिंग के लिए 25 दिन का इंतजार करने को कहा जा रहा है।
इन गंभीर शिकायतों पर जब एजेंसी का सुपरवाइजर कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाया, तो मौके पर ही पूर्ति निरीक्षक को संबंधित कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद में गैस का पर्याप्त स्टॉक है और उपभोक्ताओं को पैनिक होने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों ने सख्त हिदायत दी है कि गैस की आपूर्ति केवल होम डिलीवरी के माध्यम से ही होगी। उपभोक्ताओं को जागरूक रहने की सलाह दी गई है कि वे फोन पर किसी को भी ओटीपी साझा न करें, बल्कि सिलेंडर हाथ में मिलने के बाद ही डिलीवरी मैन को ओटीपी दें।
सभी एजेंसियों को परिसर के बाहर बड़े फ्लेक्सी बोर्ड लगाकर डिलीवरी नियमों की जानकारी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी बीच, दून मेडिकल कॉलेज और जिला चिकित्सालय की मेस में गैस सिलेंडर की किल्लत की खबरों को लेकर भी प्रशासन ने स्थिति साफ की है। जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में सामने आया कि दून मेडिकल कॉलेज में 30, गांधी शताब्दी में 8 और कोरोनेशन अस्पताल में 8 सिलेंडरों की मासिक खपत के अनुसार पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज कुमार और जिला पूर्ति अधिकारी के.के. अग्रवाल की मौजूदगी में हुई इस समीक्षा के बाद अस्पताल की मेस में किल्लत की खबरों को निराधार बताया गया है।










