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उत्तराखंड में मानसून से पहले बड़ी कामयाबी, अब मोबाइल पर खुद बजेगा खतरे का सायरन

उत्तराखंड में मानसून और चारधाम यात्रा के दौरान आपदाओं से निपटने के लिए सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया है। शनिवार को एनडीएमए और सी-डॉट के सहयोग से पूरे प्रदेश में मोबाइल उपभोक्ताओं को एक साथ आपातकालीन अलर्ट भेजे गए।

उत्तराखंड में मानसून से पहले बड़ी कामयाबी, अब मोबाइल पर खुद बजेगा खतरे का सायरन

HIGHLIGHTS

  • शनिवार सुबह 11:46 बजे प्रदेश के मोबाइल फोन पर प्रसारित हुआ अलर्ट संदेश।
  • मानसून और चारधाम यात्रा के दौरान स्थान-विशिष्ट (Location-specific) चेतावनी मिलेगी।
  • तकनीक के लिए उत्तराखंड को पहला परीक्षण राज्य चुना गया था, जो अब पूरी तरह सक्रिय है।

देहरादून, 2 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है।

शनिवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और सी-डॉट (C-DOT) ने उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली का सफल परीक्षण किया। सुबह 11 बजकर 46 मिनट पर राज्य के अधिकांश मोबाइल उपभोक्ताओं के फोन पर एक साथ यह अलर्ट संदेश प्राप्त हुआ।

विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में मिलेगी सटीक चेतावनी

इस तकनीक के आधिकारिक शुभारंभ के साथ ही अब उत्तराखंड के किसी भी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में आपदा की स्थिति में वहां मौजूद मोबाइल उपभोक्ताओं को त्वरित संदेश भेजे जा सकेंगे।

इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह स्थान-विशिष्ट (Location-specific) है। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्र के सक्रिय मोबाइल टावरों की सीमा में आने वाले सभी उपभोक्ताओं को स्वतः ही अलर्ट मिल जाएगा। इससे अनावश्यक भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी और केवल प्रभावित लोगों तक ही सूचना पहुंचेगी।

चारधाम यात्रा और मानसून के लिए ‘वरदान’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रणाली को उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य के लिए वरदान बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मानसून से पहले इस तकनीक को लागू करने के लिए लगातार केंद्र से पैरवी कर रही थी।

विशेष रूप से चारधाम यात्रा के दौरान मौसम की सटीक जानकारी और संभावित खतरों के बारे में यात्रियों और स्थानीय निवासियों को समय रहते सचेत किया जा सकेगा। सीएम धामी ने इस पहल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का आभार जताया है।

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी सूचना

प्रदेश के आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने इस प्रणाली को ‘गेम-चेंजर’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से आपदा जोखिम न्यूनीकरण में मदद मिलेगी और अंतिम व्यक्ति तक समय पर चेतावनी पहुंचाकर जनहानि को न्यूनतम किया जा सकेगा। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के विशेषज्ञों ने इसके लिए प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और अब आगामी सीजन में इसका व्यापक स्तर पर उपयोग शुरू कर दिया जाएगा।

सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम: कैसे करेगा काम?

विशेषताविवरण
प्रसारण तकनीकमोबाइल टावर सिग्नल के जरिए (इंटरनेट की अनिवार्यता नहीं)
सटीकताकेवल प्रभावित क्षेत्र के टावर क्षेत्र में संदेश जाएगा
अलर्ट का स्वरूपविशिष्ट ध्वनि (सायरन) और स्क्रीन पर फ्लैश संदेश
मुख्य लाभकम समय में लाखों लोगों तक एक साथ पहुंच
उपयोगबाढ़, भूस्खलन, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाएं

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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