देहरादून। (Dehradun Smart Vending Zone) देहरादून की सड़कों को अतिक्रमण के चंगुल से छुड़ाने और रेहड़ी-पटरी कारोबारियों की तकदीर बदलने के लिए नगर निगम ने मास्टर प्लान जमीन पर उतार दिया है। देहरादून के व्यस्त चौराहों और बाजारों में बेतरतीब खड़ी ठेलियां अब इतिहास बनने वाली हैं। मेयर सौरभ थपलियाल के कड़े निर्देशों के बाद नगर निगम ने शहर के बुनियादी ढांचे को नया रूप देने की तैयारी कर ली है।
इस योजना का सबसे मजबूत पक्ष यह है कि इसे किसी एक खास इलाके तक सीमित न रखकर दून के सभी सात विधानसभा क्षेत्रों—राजपुर रोड, धर्मपुर, रायपुर, मसूरी, कैंट, सहसपुर और डोईवाला—में समान रूप से फैलाया गया है। निगम का सीधा लक्ष्य है: ट्रैफिक का दबाव कम करना और फुटकर विक्रेताओं को सम्मानजनक पहचान देना।
इंद्रेश अस्पताल और मोहकमपुर में विशेष क्लस्टर
अधिकारियों ने ग्राउंड सर्वे के बाद हॉटस्पॉट की लिस्ट तैयार की है। इंद्रेश अस्पताल के पास एक विशाल वेंडिंग जोन बनेगा जहाँ करीब 150 ठेलियों को व्यवस्थित ढंग से खड़ा किया जा सकेगा। वहीं, मोहकमपुर क्षेत्र में दो अलग-अलग पॉइंट चिह्नित किए गए हैं, जिनमें 80 से 88 ठेलियों की क्षमता होगी।
इसके अलावा प्रमुख शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों के पास छोटे-छोटे क्लस्टर विकसित किए जाएंगे ताकि स्थानीय लोगों को अपनी जरूरत का सामान घर के पास ही मिल सके और मुख्य सड़कों पर भीड़ न बढ़े।
केवल जगह नहीं, मिलेगी पहचान और सुरक्षा
यह सिर्फ एक पार्किंग स्लॉट नहीं, बल्कि एक ‘स्मार्ट इकोसिस्टम’ होगा। इन जोन में आने वाले हर ठेला संचालक का अनिवार्य पंजीकरण (Registration) होगा और उन्हें क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र आवंटित किए जाएंगे। निगम यहां ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शौचालय, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
इससे न केवल अवैध उगाही और अतिक्रमण पर लगाम लगेगी, बल्कि ‘स्मार्ट सिटी’ की अवधारणा को भी मजबूती मिलेगी। प्रशासन का मानना है कि जब वेंडर एक तय सीमा में व्यापार करेंगे, तो पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ खाली होंगे और जाम की समस्या खुद-ब-खुद दम तोड़ देगी।










