रुद्रपुर। उत्तराखंड के संवेदनशील भूगोल को देखते हुए प्रदेश सरकार ने राहत एवं बचाव तंत्र को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखने का फैसला किया है। इसी रणनीति के तहत उधम सिंह नगर जिले में आपदा प्रबंधन अभ्यास (Disaster Management Drill) का आयोजन किया जा रहा है, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में जनहानि को न्यूनतम स्तर पर रखा जा सके। जिला प्रशासन ने इस अभ्यास को सफल बनाने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ समन्वय स्थापित कर लिया है।
पांच तहसीलों में अलग-अलग चुनौतियों पर फोकस
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी उमाशंकर नेगी ने स्पष्ट किया है कि 18 मार्च को होने वाला यह अभ्यास केवल औपचारिकता नहीं होगा। जिले की पांच तहसीलों को उनकी भौगोलिक और औद्योगिक संवेदनशीलता के आधार पर चुना गया है। काशीपुर में जहां औद्योगिक गैस रिसाव या आग जैसी स्थितियों पर ध्यान दिया जाएगा, वहीं खटीमा में बैराज टूटने के बाद आने वाली अचानक बाढ़ (Flash Flood) की स्थिति का सामना करने का अभ्यास होगा।
मानव-वन्यजीव संघर्ष और भूकंप पर भी नजर
रुद्रपुर तहसील में इस बार एक विशेष अभ्यास शामिल किया गया है, जिसमें रिहायशी इलाकों में जंगली जानवरों के घुसने और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन को परखा जाएगा। इसके अलावा गदरपुर में भूकंप के कारण होने वाले शॉर्ट सर्किट और इमारतों के गिरने जैसी स्थितियों में स्वास्थ्य विभाग की तत्परता की जांच होगी। बाजपुर में खेती-किसानी को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने वाले कीट प्रकोप से निपटने का भी पूर्वाभ्यास किया जाएगा।
विभागों के बीच तालमेल की अग्निपरीक्षा
प्रशासन के मुताबिक, 16 मार्च को टेबल टॉक बैठक के जरिए सभी विभागों को उनकी जिम्मेदारी समझाई जाएगी। इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय सूचना तंत्र को मजबूत करना और अलग-अलग विभागों के बीच ‘रिस्पॉन्स टाइम’ को कम करना है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के नियमित अभ्यासों से वास्तविक संकट के समय घबराहट कम होती है और बचाव कार्य अधिक सटीकता से पूरे किए जा सकते हैं।










