गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन को लेकर प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के एक ताजा बयान ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है।
महाराज ने सुझाव दिया है कि गैरसैंण विधानसभा परिसर का उपयोग शादी-बारात, वेडिंग शूट और कॉर्पोरेट डेस्टिनेशन के रूप में किया जाना चाहिए ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा हो सके। इस बयान के बाद गैरसैंण विधानसभा विवाद (Gairsain Assembly Controversy) ने तूल पकड़ लिया है और कांग्रेस ने इसे जनता के संघर्षों का अपमान करार दिया है।
भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि गैरसैंण केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि करोड़ों उत्तराखंडियों का सपना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सदन की कार्यवाही चल रही थी, तब मंत्री ने यह नीतिगत बयान सदन के भीतर देने के बजाय बाहर दिया।
गोदियाल ने सवाल उठाया कि क्या सरकार गुपचुप तरीके से राज्य की कीमती संपत्तियों को निजी संस्थाओं को सौंपने की साजिश रच रही है। उन्होंने मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार कौड़ियों के भाव सरकारी जमीनों को नीलाम कर रही है।
विपक्ष ने मांगा मुख्यमंत्री से जवाब
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने भी इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि जिस स्थान को लोकतंत्र के मंदिर के रूप में पूजा जाना चाहिए, वहां शादी-बारात और पार्टियों की बात करना निंदनीय है। आर्या ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस पूरे मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने गैरसैंण को एक खास पहचान दिलाने के लिए लाठियां खाई थीं, न कि इसे कमर्शियल हब बनाने के लिए।
नीतिगत मतभेद या सियासी दांव?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सतपाल महाराज का यह बयान पर्यटन को बढ़ावा देने की उनकी अपनी सोच हो सकती है, लेकिन विपक्ष इसे राज्य की अस्मिता से जोड़कर देख रहा है। कांग्रेस का तर्क है कि भाजपा सरकार के पास गैरसैंण को लेकर कोई ठोस विजन नहीं है। गणेश गोदियाल ने सदन के सभी सदस्यों से अपील की है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर सरकार को घेरें और स्पष्टीकरण की मांग करें।













