देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में रसोई गैस का संकट अब रसोई की चारदीवारी से निकलकर आम आदमी की जेब पर सीधा हमला कर रहा है। सर्वे चौक स्थित प्रसिद्ध इंदिरा अम्मा कैंटीन ने अपनी पौष्टिक थाली के दाम में 50 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर दी है। अब तक मात्र 20 रुपये में मिलने वाली थाली के लिए अब लोगों को 30 रुपये चुकाने होंगे।
कैंटीन संचालकों का कहना है कि गैस की नियमित सप्लाई ठप होने के कारण उन्हें बाजार से 1200 रुपये में अवैध तरीके से सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। इस भारी लागत ने सस्ते भोजन की व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है। इसका सबसे बुरा असर उन दैनिक मजदूरों और छात्रों पर पड़ रहा है, जो कम बजट के कारण यहां भोजन के लिए निर्भर थे।
जिले में गैस वितरण की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। शनिवार को एजेंसियों ने करीब 18 हजार सिलेंडरों की डिलीवरी जरूर की, लेकिन 90,213 सिलेंडरों का बैकलाग अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
जिला प्रशासन ने हालांकि क्यूआरटी (QRT) टीमें तैनात की हैं और हेल्पलाइन नंबर (1077, 0135-2626066) जारी किए हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर में आई तकनीकी खराबी ने संकट को और गहरा दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे खराब स्थिति आईओसीएल (IOCL) के उपभोक्ताओं की है, जहां 72,791 सिलेंडरों की वेटिंग चल रही है। इसके बाद बीपीसीएल (BPCL) में 12,729 और एचपीसीएल (HPCL) में 4,693 सिलेंडरों का बैकलाग है।
वर्तमान में जिले के पास केवल 37,488 सिलेंडरों का स्टॉक शेष है, जो मांग के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

इस संकट की जड़ें वैश्विक भू-राजनीति से जुड़ी हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई बाधित हुई है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। इस वैश्विक तनाव का असर सिडकुल के फार्मा सेक्टर पर भी दिखने लगा है, जहां उत्पादन 25 प्रतिशत तक गिर गया है।
सेलाकुई और सिडकुल के उद्यमियों ने चेतावनी दी है कि इंडस्ट्रियल डीजल और कच्चे माल की कीमतों में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है। चीन से आने वाले कंटेनरों की कमी और महंगे कच्चे माल के कारण आने वाले दिनों में जरूरी दवाओं, सिरिंज और कैथेटर की कीमतों में भी उछाल आना तय माना जा रहा है।










