नई दिल्ली। देश में बढ़ते डिजिटल लेन-देन के बीच साइबर अपराधियों के जाल को तोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने अपना सुरक्षा चक्र और कड़ा कर दिया है। नैनीताल-उधम सिंह नगर से सांसद अजय भट्ट द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने संसद को बताया कि सुरक्षा एजेंसियां अब ‘विक्टिम-सेंट्रिक’ यानी पीड़ित को केंद्र में रखकर काम कर रही हैं।
गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि 31 जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में 24.65 लाख से अधिक शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगों के चंगुल से 8,690 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बचाई गई है। यह सफलता ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (CFCFRMS) और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ के एकीकरण से संभव हुई है।
सरकार ने 2 जनवरी 2026 को एक नई व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। यह SOP विशेष रूप से उन मामलों के लिए है जहां साइबर अपराधी एक राज्य से बैठकर दूसरे राज्य के नागरिकों को निशाना बनाते हैं। अब राज्यों की पुलिस को एक साझा डिजिटल फ्रेमवर्क पर लाया गया है, जिससे एफआईआर दर्ज करने और आरोपी की गिरफ्तारी में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
साइबर जागरूकता को लेकर सरकार अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट का भी सहारा ले रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का मुद्दा उठाने के बाद, अब दिल्ली मेट्रो, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर भी विशेष जागरूकता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। कुंभ मेला 2025 और सूरजकुंड मेले के सफल अभियानों के बाद, अब दूरदर्शन पर 52 हफ्तों का विशेष शो ‘साइबर-अलर्ट’ चलाया जा रहा है।
| पहल का नाम | मुख्य उद्देश्य / उपलब्धि |
| हेल्पलाइन 1930 | वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग |
| I4C (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र) | देशव्यापी साइबर अपराधों का समन्वय |
| एनसीआरपी पोर्टल | ऑनलाइन शिकायत और एफआईआर ट्रैकिंग |
| साइबर दोस्त (@CyberDost) | सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान |











