रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT Roorkee) ने मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। संस्थान के बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग विभाग (BSBE) में नई ‘अशोक सूता मॉलिक्यूलर मेडिसिन सुविधा’ की आधिकारिक शुरुआत हो गई है। यह एडवांस लैब देश में कैंसर, संक्रामक रोगों और चयापचय (मेटाबॉलिक) संबंधी गंभीर बीमारियों के लिए सटीक दवाएं और अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक टूल विकसित करने का काम करेगी।
इस विश्वस्तरीय लैब के निर्माण के पीछे माइंडट्री और हैप्पीएस्ट माइंड्स के संस्थापक और देश के दिग्गज आईटी उद्यमी अशोक सूता का सबसे बड़ा योगदान है। साल 2021 में सूता ने उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियों पर शोध के लिए ‘स्कैन’ (SKAN – साइंटिफिक नॉलेज फॉर एजिंग एंड न्यूरोलॉजिकल एलमेंट्स) रिसर्च ट्रस्ट की स्थापना की थी।
इसी ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने अपने मातृ संस्थान IIT रुड़की को 20 करोड़ रुपये का भारी-भरकम अनुदान दिया था। इस फंड का मुख्य उद्देश्य बायपोलर और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के लिए एक अत्याधुनिक वेट-लैब (wet-lab) तैयार करना था, जिसने अब आकार ले लिया है।
नई रिसर्च सुविधा का उद्घाटन खुद अशोक सूता ने किया। इस मौके पर IIT रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत समेत कई वरिष्ठ वैज्ञानिक, संकाय सदस्य और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस नई लैब में बीमारी के मूल तंत्र को समझने, नए अणुओं (molecules) की पहचान करने और उनके प्रायोगिक परीक्षण पर सीधा काम होगा।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीजों के लिए ‘सटीक दवा’ (Precision Medicine) तैयार करने में लगने वाले समय की भारी बचत होगी।
रिसर्च की सटीकता बनाए रखने के लिए इस सुविधा को बेहद आधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है। लैब में ऑटोमेटेड प्रोटीन प्यूरीफिकेशन सिस्टम (AKTA), HPLC, UPLC, फ्लो साइटोमीटर, अपराइट कन्फोकल माइक्रोस्कोप और प्रोटीन क्रिस्टलाइजेशन रोबोट जैसे हाई-टेक एनालिटिकल प्लेटफॉर्म मौजूद हैं।
इन मशीनों की मदद से शोधकर्ता सीधे डीएनए और प्रोटीन के स्तर पर बीमारियों की पड़ताल कर सकेंगे। स्कैन बेंगलुरु और IIT रुड़की का मुख्य लक्ष्य ऐसी थेरेपी खोजना है, जो मरीजों के लिए ज्यादा सुरक्षित हों और बीमारियों के असर को धीमा कर सकें।
IIT रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने स्पष्ट किया कि यह बुनियादी ढांचा और अंतःविषयी विशेषज्ञता राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को सीधे तौर पर समर्थन देगी। वहीं, इंस्टीट्यूट इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर के प्रमुख प्रो. प्रवीन्द्र कुमार ने इसे अकादमिक और उद्योग जगत के बीच एक मजबूत सहयोगात्मक मंच बताया। इस पहल के जरिए भारत में दवा निर्माण और बायोमेडिकल रिसर्च को विदेशी निर्भरता से मुक्त कर वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से काम होगा।










