देहरादून। उत्तराखंड में अवैध खनन के खिलाफ पुष्कर सिंह धामी सरकार के कड़े रुख ने अब अपनों का भी साथ पा लिया है। हरिद्वार जिले में खनन माफिया और पुलिस के बीच साठगांठ उजागर होने के बाद, मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरी पुलिस चौकी के स्टाफ को निलंबित कर दिया गया है। इस फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकार की जमकर सराहना की है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस कार्रवाई को एक ‘मजबूत संदेश’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और प्रशासन के स्तर पर मिलीभगत हो, तो ऐसी कठोर कार्रवाई शासन की नीयत साफ करती है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में जिस अधिकारी ने इस निलंबन के आदेश को प्रभावी बनाया, वह बधाई का पात्र है क्योंकि इससे सिस्टम में डर पैदा होगा।
सांसद रावत ने इस दौरान अवैध खनन के खतरों पर एक भयावह आंकड़ा पेश किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो सालों में उत्तराखंड में अवैध खनन और इससे जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं के चलते लगभग 500 लोगों की मौत हो चुकी है। रावत के अनुसार, यह महज पर्यावरण या राजस्व का नुकसान नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिक की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर संकट बन चुका है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि केवल छोटे प्यादों या मजदूरों पर कार्रवाई से यह काला कारोबार नहीं थमेगा। उन्होंने मांग की कि सरकार को उस बड़े सिंडिकेट और सफेदपोश चेहरों को बेनकाब करना चाहिए जो पर्दे के पीछे से इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस, खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल और ईमानदारी पर जोर दिया।
राजनीतिक गलियारों में त्रिवेंद्र रावत का यह बयान काफी अहम है, अक्सर अपनी ही सरकार के कामकाज पर मुखर रहने वाले रावत ने इस बार धामी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का समर्थन किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हरिद्वार जैसा एक्शन पूरे प्रदेश में नजीर बनेगा ताकि देवभूमि की नदियों और पहाड़ों को माफिया के चंगुल से बचाया जा सके।









