देहरादून। उत्तराखंड में रसोई गैस किल्लत (LPG Shortage) ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे राजधानी देहरादून सहित कई जिलों में आम जनता के चूल्हे ठंडे होने की नौबत आ गई है। गैस कंपनियों द्वारा आपूर्ति में की गई कटौती और नियमों में अचानक आए बदलावों ने उपभोक्ताओं की कमर तोड़ दी है। स्थिति इतनी गंभीर है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में सप्लाई चेन नहीं सुधरी, तो शहर की दर्जनों गैस एजेंसियों पर ताले लटक सकते हैं।
50 हजार के पार पहुंचा बैकलॉग
राजधानी में गैस वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिले में कुल 7.81 लाख घरेलू गैस कनेक्शन हैं, जिनकी सेवा के लिए 62 एजेंसियां तैनात हैं। सामान्य दिनों में शहर को रोजाना 18 हजार सिलेंडरों की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान में महज 11 हजार सिलेंडर ही उपलब्ध हो पा रहे हैं। मांग और आपूर्ति के इसी बड़े अंतर की वजह से पेंडिंग बुकिंग यानी बैकलॉग का आंकड़ा 50 हजार को पार कर चुका है। लोग हफ़्तों पहले बुकिंग कराने के बावजूद खाली सिलेंडर लेकर एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं।
नए नियमों ने बढ़ाई मुसीबत
उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय गैस कंपनियों का नया नियम बना है। एक वित्तीय वर्ष में केवल 12 रियायती सिलेंडर देने का प्रावधान कड़ाई से लागू कर दिया गया है। पहले ई-केवाईसी करवाने पर उपभोक्ताओं को तीन अतिरिक्त सिलेंडरों की राहत मिल जाती थी, जो अब बंद कर दी गई है। जिन परिवारों ने 1 अप्रैल 2025 से अब तक अपने 12 सिलेंडरों का कोटा इस्तेमाल कर लिया है, उन्हें अब 1 अप्रैल 2026 से पहले नया सिलेंडर नहीं मिल पाएगा।
कमर्शियल सप्लाई ठप, होटल-रेस्टोरेंट बेहाल
घरेलू किल्लत के साथ-साथ कमर्शियल गैस की आपूर्ति भी पूरी तरह ठप हो गई है। जिले में करीब 19 हजार कमर्शियल उपभोक्ता हैं, जिन्हें रोजाना 1700 सिलेंडरों की जरूरत होती है। एजेंसियों ने स्टॉक की कमी के चलते होटलों और रेस्टोरेंट्स को गैस देना बंद कर दिया है। वर्तमान में बेहद सीमित स्टॉक को देखते हुए केवल अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को ही प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई दी जा रही है।
प्रशासन का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) केके अग्रवाल ने स्वीकार किया है कि जिले में गैस का संकट बना हुआ है। उन्होंने बताया कि विभाग लगातार कंपनियों के संपर्क में है और बैकलॉग कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से पैनिक न होने की अपील की है, हालांकि धरातल पर गैस वितरण की स्थिति फिलहाल सुधरती नजर नहीं आ रही है।











